Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 1 / Sukta 13 / Mantra 6

191 Sukta
12 Mantra
1/13/6
Devata- देवीर्द्वार: Rishi- मेधातिथिः काण्वः Chhanda- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
विश्र॑यन्तामृता॒वृधो॒ द्वारो॑ दे॒वीर॑स॒श्चतः॑। अ॒द्या नू॒नं च॒ यष्ट॑वे॥

वि । श्र॒य॒न्ता॒म् । ऋ॒त॒ऽवृधः॑ । द्वारः॑ । दे॒वीः । अ॒स॒श्चतः॑ । अ॒द्य । नू॒नम् । च॒ । यष्ट॑वे ॥

Mantra without Swara
विश्रयन्तामृतावृधो द्वारो देवीरसश्चतः। अद्या नूनं च यष्टवे॥

वि। श्रयन्ताम्। ऋतऽवृधः। द्वारः। देवीः। असश्चतः। अद्य। नूनम्। च। यष्टवे॥

Ashtak » 1 Adhyay » 1 Varga » 24 Mantra » 6

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
हे (मनीषिणः) बुद्धिमान् विद्वानो ! (अद्य) आज (यष्टवे) यज्ञ करने के लिये घर आदि के (असश्चतः) अलग-अलग (ऋतावृधः) सत्य सुख और जल के वृद्धि करनेवाले (देवीः) तथा प्रकाशित (द्वारः) दरवाजों का (नूनम्) निश्चय से (विश्रयन्ताम्) सेवन करो अर्थात् अच्छी रचना से उनको बनाओ॥६॥
Essence
मनुष्यों को अनेक प्रकार के द्वारों के घर, यज्ञशाला और विमान आदि यानों को बनाकर उनमें स्थिति होम और देशान्तरों में जाना-आना करना चाहिये॥६॥
Subject
अब अगले मन्त्र में घर यज्ञशाला और विमान आदि रथ अनेक द्वारों के सहित बनाने चाहियें, इस विषय का उपदेश किया है-