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Rigveda Mandal 1 / Sukta 13 / Mantra 4

191 Sukta
12 Mantra
1/13/4
Devata- इळ: Rishi- मेधातिथिः काण्वः Chhanda- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
अग्ने॑ सु॒खत॑मे॒ रथे॑ दे॒वाँ ई॑ळि॒त आ व॑ह। असि॒ होता॒ मनु॑र्हितः॥

अग्ने॑ । सु॒खऽत॑मे । रथे॑ । दे॒वान् । इ॒ळि॒तः । आ । व॒ह॒ । असि॑ । होता॑ । मनुः॑ऽहितः ॥

Mantra without Swara
अग्ने सुखतमे रथे देवाँ ईळित आ वह। असि होता मनुर्हितः॥

अग्ने। सुखऽतमे। रथे। देवान्। इळितः। आ। वह। असि। होता। मनुःऽहितः॥

Ashtak » 1 Adhyay » 1 Varga » 24 Mantra » 4

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
जो (अग्ने) भौतिक अग्नि (मनुः) विद्वान् लोग जिसको मानते हैं तथा (होता) सब सुखों का देने और (ईडितः) मनुष्यों को स्तुति करने योग्य (असि) है, वह (सुखतमे) अत्यन्त सुख देने तथा (रथे) गमन और विहार करानेवाले विमान आदि सवारियों में (हितः) स्थापित किया हुआ (देवान्) दिव्य भोगों को (आवह) अच्छे प्रकार देशान्तर में प्राप्त कराता है॥४॥
Essence
मनुष्यों को बहुत कलाओं से संयुक्त पृथिवी जल और अन्तरिक्ष में गमन का हेतु तथा अग्नि वा जल आदि पदार्थों से संयुक्त तीन प्रकार का रथ कल्याणकारक तथा अत्यन्त सुख देनेवाला होकर बहुत उत्तम-उत्तम कार्य्यों की सिद्धि को प्राप्त करानेवाला होता है॥४॥
Subject
उक्त अग्नि इस प्रकार उपकार में लिया हुआ किसका हेतु होता है, सो उपदेश अगले मन्त्र में किया है-