Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 1 / Sukta 126 / Mantra 6

191 Sukta
7 Mantra
1/126/6
Devata- विद्वाँसः Rishi- भावयव्यः Chhanda- अनुष्टुप् Swara- गान्धारः
Mantra with Swara
आग॑धिता॒ परि॑गधिता॒ या क॑शी॒केव॒ जङ्ग॑हे। ददा॑ति॒ मह्यं॒ यादु॑री॒ याशू॑नां भो॒ज्या॑ श॒ता ॥

आऽग॑धिता । परि॑ऽगधिता । या । क॒शी॒काऽइ॑व । जङ्ग॑हे । ददा॑ति । मह्य॑म् । यादु॑री । याशू॑नाम् । भो॒ज्या॑ । श॒ता ॥

Mantra without Swara
आगधिता परिगधिता या कशीकेव जङ्गहे। ददाति मह्यं यादुरी याशूनां भोज्या शता ॥

आऽगधिता। परिऽगधिता। या। कशीकाऽइव। जङ्गहे। ददाति। मह्यम्। यादुरी। याशूनाम्। भोज्या। शता ॥ १.१२६.६

Ashtak » 2 Adhyay » 1 Varga » 11 Mantra » 6

Bhashya

More bhashyas
Meaning
(या) जो (आगधिता) अच्छे प्रकार ग्रहण की हुई (परिगधिता) सब ओर से उत्तम-उत्तम गुणों से युक्त (जङ्गहे) अत्यन्त ग्रहण करने योग्य व्यवहार में (कशीकेव) पशुओं के ताड़ना देनेके लिये जो औगी होती है, उसके समान (याशूनाम्) अच्छा यत्न करनेवालों की (यादुरी) उत्तम यत्नवाली नीति (भोज्या) भोगने योग्य (शता) सैकड़ों वस्तु (मह्यम्) मुझे (ददाति) देती है, वह सबको स्वीकार करने योग्य है ॥ ६ ॥
Essence
इस मन्त्र में उपमालङ्कार है। जिस नीति अर्थात् धर्म की चाल (से) अगणित सुख हों, वह सबको सिद्ध करनी चाहिये ॥ ६ ॥
Subject
किनसे इस राज्य में क्या अवश्य पानी चाहिये, इस विषय को अगले मन्त्र में कहा है ।

We are thankful to https://vedicscriptures.in for providing us a substantial amount of data for this section of the Vedas.