Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 1 / Sukta 126 / Mantra 3

191 Sukta
7 Mantra
1/126/3
Devata- विद्वाँसः Rishi- कक्षीवान् Chhanda- त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
उप॑ मा श्या॒वाः स्व॒नये॑न द॒त्ता व॒धूम॑न्तो॒ दश॒ रथा॑सो अस्थुः। ष॒ष्टिः स॒हस्र॒मनु॒ गव्य॒मागा॒त्सन॑त्क॒क्षीवाँ॑ अभिपि॒त्वे अह्ना॑म् ॥

उप॑ । मा॒ । श्या॒वाः । स्व॒नये॑न । द॒त्ताः । व॒धूऽम॑न्तः । दश॑ । रथा॑सः । अ॒स्थुः॒ । ष॒ष्टिः । स॒हस्र॑म् । अनु॑ । गव्य॑म् । आ । अ॒गा॒त् । सन॑त् । क॒क्षीवा॑न् । अ॒भि॒ऽपि॒त्वे । अह्ना॑म् ॥

Mantra without Swara
उप मा श्यावाः स्वनयेन दत्ता वधूमन्तो दश रथासो अस्थुः। षष्टिः सहस्रमनु गव्यमागात्सनत्कक्षीवाँ अभिपित्वे अह्नाम् ॥

उप। मा। श्यावाः। स्वनयेन। दत्ताः। वधूऽमन्तः। दश। रथासः। अस्थुः। षष्टिः। सहस्रम्। अनु। गव्यम्। आ। अगात्। सनत्। कक्षीवान्। अभिऽपित्वे। अह्नाम् ॥ १.१२६.३

Ashtak » 2 Adhyay » 1 Varga » 11 Mantra » 3

Bhashya

More bhashyas
Meaning
जिस (स्वनयेन) अपने धन आदि पदार्थ के पहुँचाने अर्थात् देनेवाले ने (श्यावाः) सूर्य की किरणों के समान (दत्ताः) दिये हुए (दश) दश (रथासः) रथ (वधूमन्तः) जिनमें प्रशंसित बहुएँ विद्यमान वे (मा) मुझ सेनापति के (उपास्थुः) समीप स्थित होते तथा जो (कक्षीवान्) युद्ध में प्रशंसित कक्षावाला अर्थात् जिसकी ओर अच्छे वीर योद्धा हैं वह (अभिपित्वे) सब ओर से प्राप्ति के निमित्त (अह्नाम्, सहस्रम्) हजार दिन (गव्यम्) गौओं के दुग्ध आदि पदार्थ को (अन्वागात्) प्राप्त होता और जिसके (षष्टिः) साठ पुरुष पीछे चलते वह (सनत्) सदा सुख का बढ़ानेवाला है ॥ ३ ॥
Essence
इस मन्त्र में वाचकलुप्तोपमालङ्कार है। जिस कारण सब योद्धा राजा के समीप से धन आदि पदार्थ की प्राप्ति चाहते हैं, इससे राजा को उनके लिये यथायोग्य धन आदि पदार्थ देना योग्य है, ऐसे विना किये उत्साह नहीं होता ॥ ३ ॥
Subject
फिर राजा को क्या करना चाहिये, इस विषय का उपदेश अगले मन्त्र में किया है ।

We are thankful to https://vedicscriptures.in for providing us a substantial amount of data for this section of the Vedas.