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Rigveda Mandal 1 / Sukta 124 / Mantra 9

191 Sukta
13 Mantra
1/124/9
Devata- उषाः Rishi- कक्षीवान् दैर्घतमसः औशिजः Chhanda- निचृत्त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
आ॒सां पूर्वा॑सा॒मह॑सु॒ स्वसॄ॑णा॒मप॑रा॒ पूर्वा॑म॒भ्ये॑ति प॒श्चात्। ताः प्र॑त्न॒वन्नव्य॑सीर्नू॒नम॒स्मे रे॒वदु॑च्छन्तु सु॒दिना॑ उ॒षास॑: ॥

आ॒साम् । पूर्वा॑साम् । अह॑ऽसु । स्वसृ॑ॠणाम् । अप॑रा । पूर्वा॑म् । अ॒भि । ए॒ति॒ । प॒श्चात् । ताः । प्र॒त्न॒ऽवत् । नव्य॑सीः । नू॒नम् । अ॒स्मे इति॑ । रे॒वत् । उ॒च्छ॒न्तु॒ । सु॒ऽदिनाः॑ । उ॒षसः॑ ॥

Mantra without Swara
आसां पूर्वासामहसु स्वसॄणामपरा पूर्वामभ्येति पश्चात्। ताः प्रत्नवन्नव्यसीर्नूनमस्मे रेवदुच्छन्तु सुदिना उषास: ॥

आसाम्। पूर्वासाम्। अहऽसु। स्वसॄणाम्। अपरा। पूर्वाम्। अभि। एति। पश्चात्। ताः। प्रत्नऽवत्। नव्यसीः। नूनम्। अस्मे इति। रेवत्। उच्छन्तु। सुऽदिनाः। उषसः ॥ १.१२४.९

Ashtak » 2 Adhyay » 1 Varga » 8 Mantra » 4

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
जैसे (आसाम्) इन (पूर्वासाम्) प्रथम उत्पन्न जेठी (स्वसॄणाम्) बहिनों में (अपरा) अन्य कोई पीछे उत्पन्न हुई छोटी बहिन (अहसु) किन्हीं दिनों में अपनी (पूर्वाम्) जेठी बहिन के (अभ्येति) आगे जावे और (पश्चात्) पीछे अपने घर को चली जावे वैसे (सुदिनाः) जिनसे अच्छे-अच्छे दिन होते वे (उषसः) प्रातःसमय की वेला (अस्मे) हम लोगों के लिये (नूनम्) निश्चययुक्त (प्रत्नवत्) जिसमें पुरानी धन की धरोहर है उस (रेवत्) प्रशंसित पदार्थ युक्त धन को (नव्यसीः) प्रति दिन अत्यन्त नवीन होती हुई प्रकाश करे (ताः) वे (उच्छन्तु) अन्धकार को निराला करें ॥ ९ ॥
Essence
जैसे बहुत बहिनें दूर दूर देश में विवाही हुई होती उनमें कभी किसी के साथ कोई मिलती और अपने व्यवहार को कहती है, वैसे पिछिली प्रातःसमय की वेला वर्त्तमान वेला के साथ संयुक्त होकर अपने व्यवहार को प्रसिद्ध करती है ॥ ९ ॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहा है ।