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Rigveda Mandal 1 / Sukta 124 / Mantra 11

191 Sukta
13 Mantra
1/124/11
Devata- उषाः Rishi- कक्षीवान् दैर्घतमसः औशिजः Chhanda- त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
अवे॒यम॑श्वैद्युव॒तिः पु॒रस्ता॑द्यु॒ङ्क्ते गवा॑मरु॒णाना॒मनी॑कम्। वि नू॒नमु॑च्छा॒दस॑ति॒ प्र के॒तुर्गृ॒हंगृ॑ह॒मुप॑ तिष्ठाते अ॒ग्निः ॥

अव॑ । इ॒यम् । अ॒श्वै॒त् । यु॒व॒तिः । पु॒रस्ता॑त् । यु॒ङ्क्ते । गवा॑म् । अ॒रु॒णाना॑म् । अनी॑कम् । वि । नू॒नम् । उ॒च्छा॒त् । अस॑ति । प्र । के॒तुः । गृ॒हम्ऽगृ॑हम् । उप॑ । ति॒ष्ठा॒ते॒ । अ॒ग्निः ॥

Mantra without Swara
अवेयमश्वैद्युवतिः पुरस्ताद्युङ्क्ते गवामरुणानामनीकम्। वि नूनमुच्छादसति प्र केतुर्गृहंगृहमुप तिष्ठाते अग्निः ॥

अव। इयम्। अश्वैत्। युवतिः। पुरस्तात्। युङ्क्ते। गवाम्। अरुणानाम्। अनीकम्। वि। नूनम्। उच्छात्। असति। प्र। केतुः। गृहम्ऽगृहम्। उप। तिष्ठाते। अग्निः ॥ १.१२४.११

Ashtak » 2 Adhyay » 1 Varga » 9 Mantra » 1

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Meaning
जैसे (इयम्) यह प्रभातवेला (अरुणानाम्) लाली लिये हुए (गवाम्) सूर्य की किरणों के (अनीकम्) सेना के समान समूह को (युङ्क्ते) जोड़ती और (पुरस्तादवाश्वैत्) पहिले से बढ़ती है वैसे (युवतिः) पूरी चौबीस वर्ष की ज्वान स्त्री लाल रङ्ग के गौ आदि पशुओं के समूह को जोड़ती पीछे उन्नति को प्राप्त होती इससे (प्र, केतुः) उठी है शिखा जिसकी वह बढ़ती हुई प्रभात वेला (असति) हो और (नूनम्) निश्चय से (व्युच्छात्) सबको प्राप्त हो (अग्निः) तथा सूर्यमण्डल का तरुण ताप उत्कट धाम (गृहंगृहम्) घर-घर (उप, तिष्ठाते) उपस्थित हो युवति भी उत्तम बुद्धिवाली होती, निश्चय से सब पदार्थों को प्राप्त होती और इसका उत्कट प्रताप घर-घर उपस्थित होता अर्थात् सब स्त्री-पुरुष जानते और मानते हैं ॥ ११ ॥
Essence
इस मन्त्र में वाचकलुप्तोपमालङ्कार है। जैसे प्रभातवेला और दिन सदैव मिले हुए वर्त्तमान हैं, वैसे ही विवाहित स्त्री-पुरुष मेल से अपना वर्त्ताव रक्खें और जिस नियम के जो पदार्थ हों, उस नियम से उनको पावें तब इनका प्रताप बढ़ता है ॥ ११ ॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहा है ।

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