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Rigveda Mandal 1 / Sukta 123 / Mantra 4

191 Sukta
13 Mantra
1/123/4
Devata- उषाः Rishi- दीर्घतमसः पुत्रः कक्षीवान् Chhanda- निचृत्त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
गृ॒हंगृ॑हमह॒ना या॒त्यच्छा॑ दि॒वेदि॑वे॒ अधि॒ नामा॒ दधा॑ना। सिषा॑सन्ती द्योत॒ना शश्व॒दागा॒दग्र॑मग्र॒मिद्भ॑जते॒ वसू॑नाम् ॥

गृ॒हम्ऽगृ॑हम् । अ॒ह॒ना । या॒ति॒ । अच्छ॑ । दि॒वेऽदि॑वे । अधि॑ । नाम॑ । दधा॑ना । सिसा॑सन्ती । द्यो॒त॒ना । शश्व॑त् । आ । अ॒गा॒त् । अग्र॑म्ऽअग्रम् । इत् । भ॒ज॒ते॒ । वसू॑नाम् ॥

Mantra without Swara
गृहंगृहमहना यात्यच्छा दिवेदिवे अधि नामा दधाना। सिषासन्ती द्योतना शश्वदागादग्रमग्रमिद्भजते वसूनाम् ॥

गृहम्ऽगृहम्। अहना। याति। अच्छ। दिवेऽदिवे। अधि। नाम। दधाना। सिसासन्ती। द्योतना। शश्वत्। आ। अगात्। अग्रम्ऽअग्रम्। इत्। भजते। वसूनाम् ॥ १.१२३.४

Ashtak » 2 Adhyay » 1 Varga » 4 Mantra » 4

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
जो स्त्री जैसे प्रातःकाल की वेला (अहना) दिन वा व्याप्ति से (गृहंगृहम्) घर-घर को (अच्छाधियाति) उत्तम रीति के साथ अच्छी ऊपर से आती (दिवेदिवे) और प्रतिदिन (नाम) नाम (दधाना) धरती अर्थात् दिन-दिन का नाम आदित्यवार, सोमवार आदि धरती (द्योतना) प्रकाशमान (वसूनाम्) पृथिवी आदि लोकों के (अग्रमग्रम्) प्रथम-प्रथम स्थान को (भजते) भजती और (शश्वत्) निरन्तर (इत्) हो (आ, अगात्) आती है, वैसे (सिषासन्ती) उत्तम पदार्थ पति आदि को दिया चाहती हो, वह घर के काम को सुशोभित करनेहारी हो ॥ ४ ॥
Essence
इस मन्त्र में वाचकलुप्तोपमालङ्कार है। जैसे सूर्य की कान्ति-घाम सब पदार्थों के अगले-अगले भाग को सेवन करती और नियम से प्रत्येक समय प्राप्त होती है, वैसे स्त्री को भी होना चाहिये ॥ ४ ॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहा है ।