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Rigveda Mandal 1 / Sukta 123 / Mantra 2

191 Sukta
13 Mantra
1/123/2
Devata- उषाः Rishi- दीर्घतमसः पुत्रः कक्षीवान् Chhanda- निचृत्त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
पूर्वा॒ विश्व॑स्मा॒द्भुव॑नादबोधि॒ जय॑न्ती॒ वाजं॑ बृह॒ती सनु॑त्री। उ॒च्चा व्य॑ख्यद्युव॒तिः पु॑न॒र्भूरोषा अ॑गन्प्रथ॒मा पू॒र्वहू॑तौ ॥

पूर्वा॑ । विश्व॑स्मात् । भुव॑नात् । अ॒बो॒धि॒ । जय॑न्ती । वाज॑म् । बृ॒ह॒ती । सनु॑त्री । उ॒च्चा । वि । अ॒ख्य॒त् । यु॒व॒तिः । पु॒नः॒ऽभूः । आ । उ॒षाः । अ॒ग॒न् । प्र॒थ॒मा । पू॒र्वऽहू॑तौ ॥

Mantra without Swara
पूर्वा विश्वस्माद्भुवनादबोधि जयन्ती वाजं बृहती सनुत्री। उच्चा व्यख्यद्युवतिः पुनर्भूरोषा अगन्प्रथमा पूर्वहूतौ ॥

पूर्वा। विश्वस्मात्। भुवनात्। अबोधि। जयन्ती। वाजम्। बृहती। सनुत्री। उच्चा। वि। अख्यत्। युवतिः। पुनःऽभूः। आ। उषाः। अगन्। प्रथमा। पूर्वऽहूतौ ॥ १.१२३.२

Ashtak » 2 Adhyay » 1 Varga » 4 Mantra » 2

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
(पूर्वहूतौ) जिसमें वृद्धजनों का बुलाना होता उस गृहस्थाश्रम में जो (पुनर्भूः) विवाहे हुए पति के मर जाने पीछे नियोग से फिर सन्तान उत्पन्न करनेवाली होती वह (वाजम्) उत्तम ज्ञान को (जयन्ती) जीतती हुई (बृहती) बड़ी (सनुत्री) सब व्यवहारों को अलग-अलग करने और (प्रथमा) प्रथम (युवतिः) युवा अवस्था को प्राप्त होनेवाली नवोढा स्त्री जैसे (उषाः) प्रातःकाल की वेला (विश्वस्मात्) समस्त (भुवनात्) जगत् के पदार्थों से (पूर्वा) प्रथम (अबोधि) जानी जाती और (उच्चा) ऊँची-ऊँची वस्तुओं को (वि, अख्यत्) अच्छे प्रकार प्रकट करती, वैसे (आ, अगन्) आती है, वह विवाह में योग्य होती है ॥ २ ॥
Essence
इस मन्त्र में वाचकलुप्तोपमालङ्कार है। सब कन्या पच्चीस वर्ष अपनी आयु को विद्या के अभ्यास करने में व्यतीत कर पूरी विद्यावाली होकर अपने समान पति से विवाह कर प्रातःकाल की वेला के समान अच्छे रूपवाली हों ॥ २ ॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहा है ।