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Rigveda Mandal 1 / Sukta 123 / Mantra 12

191 Sukta
13 Mantra
1/123/12
Devata- उषाः Rishi- दीर्घतमसः पुत्रः कक्षीवान् Chhanda- निचृत्त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
अश्वा॑वती॒र्गोम॑तीर्वि॒श्ववा॑रा॒ यत॑माना र॒श्मिभि॒: सूर्य॑स्य। परा॑ च॒ यन्ति॒ पुन॒रा च॑ यन्ति भ॒द्रा नाम॒ वह॑माना उ॒षास॑: ॥

अश्व॑ऽवतीः । गोऽम॑तीः । वि॒श्वऽवा॑राः । यत॑मानाः । र॒श्मिऽभिः॑ । सूर्य॑स्य । परा॑ । च॒ । यन्ति॑ । पुनः॑ । आ । च॒ । य॒न्ति॒ । भ॒द्रा । नाम॑ । वह॑मानाः । उ॒षसः॑ ॥

Mantra without Swara
अश्वावतीर्गोमतीर्विश्ववारा यतमाना रश्मिभि: सूर्यस्य। परा च यन्ति पुनरा च यन्ति भद्रा नाम वहमाना उषास: ॥

अश्वऽवतीः। गोऽमतीः। विश्वऽवाराः। यतमानाः। रश्मिऽभिः। सूर्यस्य। परा। च। यन्ति। पुनः। आ। च। यन्ति। भद्रा। नाम। वहमानाः। उषसः ॥ १.१२३.१२

Ashtak » 2 Adhyay » 1 Varga » 6 Mantra » 2

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1 Bhashyas
Meaning
हे स्त्रियो ! जैसे (सूर्यस्य) सूर्यमण्डल की (रश्मिभिः) किरणों के साथ उत्पन्न (यतमानाः) उत्तम यत्न करती हुई (अश्वावतीः) जिनकी प्रशंसित व्याप्तियाँ (गोमतीः) जो बहुत पृथिवी आदि लोक और किरणों से युक्त (विश्ववाराः) समस्त जगत् को अपने में लेती और (भद्रा) अच्छे (नाम) नामों को (वहमानाः) सबकी बुद्धियों में पहुँचाती हुई (उषसः) प्रभातवेला नियम के साथ (परा, यन्ति) पीछे को जाती (च) और (पुनः) फिर (च) भी (आ, यन्ति) आती हैं, वैसे नियम से तुम अपना वर्त्ताव वर्तो ॥ १२ ॥
Essence
इस मन्त्र में वाचकलुप्तोपमालङ्कार है। जैसे प्रभातवेला सूर्य के संयोग से नियम को प्राप्त हैं, वैसे विवाहित स्त्रीपुरुष परस्पर प्रेम के स्थिर करनेहारे हों ॥ १२ ॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहा है ।