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Rigveda Mandal 1 / Sukta 122 / Mantra 6

191 Sukta
15 Mantra
1/122/6
Devata- विश्वेदेवा: Rishi- कक्षीवान् Chhanda- विराट्पङ्क्ति Swara- पञ्चमः
Mantra with Swara
श्रु॒तं मे॑ मित्रावरुणा॒ हवे॒मोत श्रु॑तं॒ सद॑ने वि॒श्वत॑: सीम्। श्रोतु॑ न॒: श्रोतु॑रातिः सु॒श्रोतु॑: सु॒क्षेत्रा॒ सिन्धु॑र॒द्भिः ॥

श्रु॒तम् । मे॒ । मि॒त्रा॒व॒रु॒णा॒ । हवा॑ । इ॒मा । उ॒त । श्रु॒त॒म् । सद॑ने । वि॒श्वतः॑ । सी॒म् । श्रोतु॑ । नः॒ । श्रोतु॑ऽरातिः । सु॒ऽश्रोतुः॑ । सु॒ऽक्षेत्रा॑ । सिन्धुः॑ । अ॒त्ऽभिः ॥

Mantra without Swara
श्रुतं मे मित्रावरुणा हवेमोत श्रुतं सदने विश्वत: सीम्। श्रोतु न: श्रोतुरातिः सुश्रोतु: सुक्षेत्रा सिन्धुरद्भिः ॥

श्रुतम्। मे। मित्रावरुणा। हवा। इमा। उत। श्रुतम्। सदने। विश्वतः। सीम्। श्रोतु। नः। श्रोतुऽरातिः। सुऽश्रोतुः। सुऽक्षेत्रा। सिन्धुः। अत्ऽभिः ॥ १.१२२.६

Ashtak » 2 Adhyay » 1 Varga » 2 Mantra » 1

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Meaning
हे (मित्रावरुणा) मित्र और उत्तम जन (सुश्रोतुः मे) मुझ अच्छे सुननेवाले के (इमा) इन (हवा) देने-लेने योग्य वचनों को (श्रुतम्) सुनो (उत) और (सदने) सभा वा (विश्वतः) सब ओर से (सीम्) मर्य्यादा में (श्रुतम्) सुनो अर्थात् वहाँ की चर्चा को समझो तथा (अद्भिः) जलों से जैसे (सिन्धुः) नदी (सुक्षेत्रा) उत्तम खेतों को प्राप्त हो वैसे (श्रोतुरातिः) जिसका सुनना दूसरे को देना है, वह (नः) हम लोगों के वचनों को (श्रोतु) सुने ॥ ६ ॥
Essence
इस मन्त्र में वाचकलुप्तोपमालङ्कार है। विद्वानों को चाहिये कि सबके प्रश्नों को सुन के यथावत् उनका समाधान करें ॥ ६ ॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहा है ।

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