Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 1 / Sukta 122 / Mantra 10

191 Sukta
15 Mantra
1/122/10
Devata- विश्वेदेवा: Rishi- कक्षीवान् Chhanda- विराट्त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
स व्राध॑तो॒ नहु॑षो॒ दंसु॑जूत॒: शर्ध॑स्तरो न॒रां गू॒र्तश्र॑वाः। विसृ॑ष्टरातिर्याति बाळ्ह॒सृत्वा॒ विश्वा॑सु पृ॒त्सु सद॒मिच्छूर॑: ॥

सः । व्राध॑तः । नहु॑षः । दम्ऽसु॑जूतः । शर्धः॑ऽतरः । न॒राम् । गू॒र्तऽश्र॑वाः । विसृ॑ष्टऽरातिः । या॒ति॒ । बा॒ळ्ह॒ऽसृत्वा॑ । विश्वा॑सु । पृ॒त्ऽसु । सद॑म् । इत् । शूरः॑ ॥

Mantra without Swara
स व्राधतो नहुषो दंसुजूत: शर्धस्तरो नरां गूर्तश्रवाः। विसृष्टरातिर्याति बाळ्हसृत्वा विश्वासु पृत्सु सदमिच्छूर: ॥

सः। व्राधतः। नहुषः। दम्ऽसुजूतः। शर्धःऽतरः। नराम्। गूर्तऽश्रवाः। विसृष्टऽरातिः। याति। बाळ्हऽसृत्वा। विश्वासु। पृत्ऽसु। सदम्। इत्। शूरः ॥ १.१२२.१०

Ashtak » 2 Adhyay » 1 Varga » 2 Mantra » 5

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
जो (दंसुजूतः) विनाश करनेहारे वीरों ने प्रेरणा किया (शर्धस्तरः) अत्यन्त बलवान् (गूर्त्तश्रवाः) जिसका उद्यम के साथ सुनना और अन्न आदि पदार्थ (विसृष्टरातिः) जिसने अनेक प्रकार के दान आदि उत्तम-उत्तम काम सिद्ध किये (बाढसृत्वा) जो प्रशंसित बल से चलने (शूरः) और शत्रुओं को मारनेवाला (नहुषः) मनुष्य (नराम्) नायक वीरों की (विश्वासु) समस्त (पृत्सु) सेनाओं में (सदम्) शत्रुओं के मारनेवाले वीर सेनाजन को (इत्) ही ग्रहण कर (व्राधतः) विरोध करनेवालों को युद्ध के लिये (याति) प्राप्त होता है (सः) वह विजय को पाता है ॥ १० ॥
Essence
मनुष्यों को चाहिये कि अपने शत्रु से अधिक युद्ध की सामग्री को इकट्ठी कर अच्छे पुरुषों के सहाय से उस शत्रु को जीतें ॥ १० ॥
Subject
अब युद्ध के विषय का उपदेश अगले मन्त्र में किया है ।