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Rigveda Mandal 1 / Sukta 120 / Mantra 8

191 Sukta
12 Mantra
1/120/8
Devata- अश्विनौ Rishi- उशिक्पुत्रः कक्षीवान् Chhanda- भुरिगुष्णिक् Swara- ऋषभः
Mantra with Swara
मा कस्मै॑ धातम॒भ्य॑मि॒त्रिणे॑ नो॒ माकुत्रा॑ नो गृ॒हेभ्यो॑ धे॒नवो॑ गुः। स्त॒ना॒भुजो॒ अशि॑श्वीः ॥

मा । कस्मै॑ । धा॒त॒म् । अ॒भि । अ॒मि॒त्रिणे॑ । नः॒ । मा । अ॒कुत्र॑ । नः॒ । गृ॒हेभ्यः॑ । धे॒नवः॑ । गुः॒ । स्त॒न॒ऽभुजः॑ । अशि॑श्वीः ॥

Mantra without Swara
मा कस्मै धातमभ्यमित्रिणे नो माकुत्रा नो गृहेभ्यो धेनवो गुः। स्तनाभुजो अशिश्वीः ॥

मा। कस्मै। धातम्। अभि। अमित्रिणे। नः। मा। अकुत्र। नः। गृहेभ्यः। धेनवः। गुः। स्तनऽभुजः। अशिश्वीः ॥ १.१२०.८

Ashtak » 1 Adhyay » 8 Varga » 23 Mantra » 3

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1 Bhashyas
Meaning
हे रक्षा करनेहारे सभासेनाधीशों ! तुम लोग (कस्मै) किसी (अमित्रिणे) ऐसे मनुष्य के लिये कि जिसके मित्र नहीं अर्थात् सबका शत्रु (नः) हम लोगों को (मा) मत (अभिधातम्) कहो, आपकी रक्षा से (नः) हम लोगों की (स्तनाभुजः) दूध भरे हुए थनों से अपने बछड़ों समेत मनुष्य आदि प्राणियों को पालती हुई (धेनवः) गौयें (अशिश्वीः) बछड़ों से रहित अर्थात् बन्ध्या (मा) मत हों और वे हमारे (गृहेभ्यः) घरों से (अकुत्र) विदेश में मत (गुः) पहुँचे ॥ ८ ॥
Essence
प्रजाजन राजजनों को ऐसी शिक्षा देवें कि हम लोगों को शत्रुजन मत पीड़ा दें और हमारे गौ, बैल, घोड़े आदि पशुओं को न चोर लें, ऐसा आप यत्न करो ॥ ८ ॥
Subject
अब राजधर्म का उपदेश अगले मन्त्र में करते हैं।