Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 1 / Sukta 120 / Mantra 7

191 Sukta
12 Mantra
1/120/7
Devata- अश्विनौ Rishi- उशिक्पुत्रः कक्षीवान् Chhanda- स्वराडार्ष्यनुष्टुप् Swara- गान्धारः
Mantra with Swara
यु॒वं ह्यास्तं॑ म॒हो रन्यु॒वं वा॒ यन्नि॒रत॑तंसतम्। ता नो॑ वसू सुगो॒पा स्या॑तं पा॒तं नो॒ वृका॑दघा॒योः ॥

यु॒वम् । हि । आस्त॑म् । म॒हः । रन् । यु॒वम् । वा॒ । यत् । निः॒ऽअत॑तंसतम् । ता । नः॒ । व॒सू॒ इति॑ । सु॒ऽगो॒पा । स्या॒त॒म् । पा॒तम् । नः॒ । वृका॑त् । अ॒घ॒ऽयोः ॥

Mantra without Swara
युवं ह्यास्तं महो रन्युवं वा यन्निरततंसतम्। ता नो वसू सुगोपा स्यातं पातं नो वृकादघायोः ॥

युवम्। हि। आस्तम्। महः। रन्। युवम्। वा। यत्। निःऽअततंसतम्। ता। नः। वसू इति। सुऽगोपा। स्यातम्। पातम्। नः। वृकात्। अघऽयोः ॥ १.१२०.७

Ashtak » 1 Adhyay » 8 Varga » 23 Mantra » 2

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
हे (वसू) निवास करानेहारे अध्यापक-उपदेशको ! (रन्) औरों को सुख देते हुए जो (युवम्) तुम (यत्) जिस पर (आस्तम्) बैठो (वा) अथवा (युवम्) तुम दोनों (नः) हम लोगों के (सुगोपा) भली-भाँति रक्षा करनेहारे (स्यातम्) होओ, वे (महः) बड़ा (अघायोः) जोकि अपने को अन्याय करने से पाप चाहता (वृकात्) उस चोर डाकू से (नः) हम लोगों को (पातम्) पालो और (ता) वे (हि) ही आप दोनों (निरततंसतम्) विद्या आदि उत्तम भूषणों से परिपूर्ण शोभायमान करो ॥ ७ ॥
Essence
जैसे सभा सेनाधीश चोर आदि के भय से प्रजाजनों की रक्षा करें वैसे ये भी सब प्रजाजनों के पालना करने योग्य होवें। सब अध्यापक उपदेशक तथा शिक्षक आदि मनुष्य धर्म में स्थिर हुए अधर्म का विनाश करें ॥ ७ ॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहा है ।