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Rigveda Mandal 1 / Sukta 120 / Mantra 5

191 Sukta
12 Mantra
1/120/5
Devata- अश्विनौ Rishi- उशिक्पुत्रः कक्षीवान् Chhanda- आर्ष्युष्णिक् Swara- ऋषभः
Mantra with Swara
प्र या घोषे॒ भृग॑वाणे॒ न शोभे॒ यया॑ वा॒चा यज॑ति पज्रि॒यो वा॑म्। प्रैष॒युर्न वि॒द्वान् ॥

प्र । या । घोषे॑ । भृग॑वाणे । न । शोभे॑ । यया॑ । वा॒चा । यज॑ति । प॒ज्रि॒यः । वा॒म् । प्र । इ॒ष॒ऽयुः । न । वि॒द्वान् ॥

Mantra without Swara
प्र या घोषे भृगवाणे न शोभे यया वाचा यजति पज्रियो वाम्। प्रैषयुर्न विद्वान् ॥

प्र। या। घोषे। भृगवाणे। न। शोभे। यया। वाचा। यजति। पज्रियः। वाम्। प्र। इषऽयुः। न। विद्वान् ॥ १.१२०.५

Ashtak » 1 Adhyay » 8 Varga » 22 Mantra » 5

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1 Bhashyas
Meaning
हे समस्त विद्याओं में रमे हुए पढ़ाने और उपदेश करनेहारे विद्वानो ! (पज्रियः) पाने योग्य बोधों को प्राप्त (इषयुः) सब जनों के अभीष्ट सुख को प्राप्त होनेवाला मनुष्य (विद्वान्) विद्यावान् सज्जन के (न) समान (यया) जिस (वाचा) वाणी से (वाम्) तुम्हारा (प्र, यजति) अच्छा सत्कार करता है, उस वाणी से मैं (शोभे) शोभा पाऊँ, (प्र) जो विदुषी स्त्री (भृगवाणे) अच्छे गुणों से पक्की बुद्धिवाले विद्वान् के समान आचरण करनेवाले में (घोषे) उत्तम वाणी के निमित्त सत्कार करती (न) सी दीखती है, उस वाणी से मैं उक्त स्त्री का (प्र) सत्कार करूँ ॥ ५ ॥
Essence
इस मन्त्र में उपमालङ्कार है। हे पढ़ाने और उपदेश करनेहारे विद्वानो ! आप उत्तम शास्त्र जाननेहारे श्रेष्ठ सज्जन के समान सबके सुख के लिये नित्य प्रवृत्त रहो, ऐसे विदुषी स्त्री भी हो। सब मनुष्य विद्याधर्म और अच्छे शीलयुक्त होते हुए निरन्तर शोभायुक्त हों। कोई विद्वान् मूर्ख स्त्री के साथ विवाह न करे और न कोई पढ़ी स्त्री मूर्ख के साथ विवाह करे, किन्तु मूर्ख मूर्खा से और विद्वान् मनुष्य विदुषी स्त्री से सम्बन्ध करें ॥ ५ ॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहा है ।