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Rigveda Mandal 1 / Sukta 120 / Mantra 3

191 Sukta
12 Mantra
1/120/3
Devata- अश्विनौ Rishi- उशिक्पुत्रः कक्षीवान् Chhanda- स्वराट्ककुबुष्णिक् Swara- ऋषभः
Mantra with Swara
ता वि॒द्वांसा॑ हवामहे वां॒ ता नो॑ वि॒द्वांसा॒ मन्म॑ वोचेतम॒द्य। प्रार्च॒द्दय॑मानो यु॒वाकु॑: ॥

ता । वि॒द्वांसा॑ । ह॒वा॒म॒हे॒ । वा॒म् । ता । नः॒ । वि॒द्वांसा॑ । मन्म॑ । वो॒चे॒त॒म् । अ॒द्य । प्र । आ॒र्च॒त् । दय॑मानः । यु॒वाकुः॑ ॥

Mantra without Swara
ता विद्वांसा हवामहे वां ता नो विद्वांसा मन्म वोचेतमद्य। प्रार्चद्दयमानो युवाकु: ॥

ता। विद्वांसा। हवामहे। वाम्। ता। नः। विद्वांसा। मन्म। वोचेतम्। अद्य। प्र। आर्चत्। दयमानः। युवाकुः ॥ १.१२०.३

Ashtak » 1 Adhyay » 8 Varga » 22 Mantra » 3

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Meaning
जो (विद्वांसा) पूरी विद्या पढ़े उत्तम आप्त अध्यापक तथा उपदेशक विद्वान् (अद्य) इस समय में (नः) हम लोगों के लिये (मन्म) मानने योग्य उत्तम वेदों में कहे हुए ज्ञान का (वोचेतम्) उपदेश करें (ता) उन समस्त विद्या से उत्पन्न हुए प्रश्नों के उत्तर देने और (विद्वांसा) सब उत्तम विद्याओं के जतानेहारे (वाम्) तुम दोनों विद्वानों को हम लोग (हवामहे) स्वीकार करते हैं जो (दयमानः) सबके ऊपर दया करता हुआ (युवाकुः) मनुष्यों को समस्त विद्याओं के साथ संयोग करानेहारा मनुष्य (ता) उन तुम दोनों विद्वानों का (प्र, आर्चत्) सत्कार करे, उसका तुम सत्कार करो ॥ ३ ॥
Essence
इस संसार में जो जिसके लिये सत्य विद्याओं को देवे वह उसको मन, वाणी और शरीर से सेवे और जो कपट से विद्या को छिपावे उसका निरन्तर तिरस्कार करे। ऐसे सब लोग मिल-मिलाके विद्वानों का मान और मूर्खों का अपमान निरन्तर करें, जिससे सत्कार को पाये हुए विद्वान् विद्या के प्रचार करने में अच्छे-अच्छे यत्न करें और अपमान को पाये हुए मूर्ख भी करें ॥ ३ ॥
Subject
अब अध्यापक और उपदेशक विद्वान् क्या करें, इस विषय को अगले मन्त्र में कहा है ।

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