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Rigveda Mandal 1 / Sukta 12 / Mantra 7

191 Sukta
12 Mantra
1/12/7
Devata- अग्निः Rishi- मेधातिथिः काण्वः Chhanda- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
क॒विम॒ग्निमुप॑स्तुहि स॒त्यध॑र्माणमध्व॒रे। दे॒वम॑मीव॒चात॑नम्॥

क॒विम् । अ॒ग्निम् । उप॑ । स्तु॒हि॒ । स॒त्यऽध॑र्माणम् । अ॒ध्व॒रे । दे॒वम् । अ॒मी॒व॒ऽचात॑नम् ॥

Mantra without Swara
कविमग्निमुपस्तुहि सत्यधर्माणमध्वरे। देवममीवचातनम्॥

कविम्। अग्निम्। उप। स्तुहि। सत्यऽधर्माणम्। अध्वरे। देवम्। अमीवऽचातनम्॥

Ashtak » 1 Adhyay » 1 Varga » 23 Mantra » 1

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
हे मनुष्य ! तू (अध्वरे) उपासना करने योग्य व्यवहार में (सत्यधर्माणम्) जिसके धर्म नित्य और सनातन हैं, जो (अमीवचातनम्) अज्ञान आदि दोषों का विनाश करने तथा (कविम्) सब की बुद्धियों को अपने सर्वज्ञपन से प्राप्त होकर (देवम्) सब सुखों का देनेवाला (अग्निम्) सर्वज्ञ ईश्वर है, उसको (उपस्तुहि) मनुष्यों के समीप प्रकाशित कर॥१॥७॥हे मनुष्य ! तू (अध्वरे) करने योग्य यज्ञ में (सत्यधर्माणम्) जो कि अविनाशी गुण और (अमीवचातनम्) ज्वरादि रोगों का विनाश करने तथा (कविम्) सब स्थूल पदार्थों को दिखानेवाला और (देवम्) सब सुखों का दाता (अग्निम्) भौतिक अग्नि है, उसको (उपस्तुहि) सब के समीप सदा प्रकाशित कर॥२॥७॥
Essence
इस मन्त्र में श्लेषालङ्कार है। मनुष्यों को सत्यविद्या से धर्म की प्राप्ति तथा शिल्पविद्या की सिद्धि के लिये ईश्वर और भौतिक अग्नि के गुण अलग-अलग प्रकाशित करने चाहियें। जिससे प्राणियों को रोग आदि के विनाशपूर्वक सब सुखों की प्राप्ति यथावत् हो॥७॥
Subject
अगले मन्त्र में अग्नि शब्द से ईश्वर और भौतिक अग्नि का उपदेश किया है-