Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 1 / Sukta 12 / Mantra 5

191 Sukta
12 Mantra
1/12/5
Devata- अग्निः Rishi- मेधातिथिः काण्वः Chhanda- निचृद्गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
घृता॑हवन दीदिवः॒ प्रति॑ ष्म॒ रिष॑तो दह। अग्ने॒ त्वं र॑क्ष॒स्विनः॑॥

घृत॑ऽआहवन । दी॒दि॒ऽवः॒ । प्रति॑ । स्म॒ । रिष॑तः । द॒ह॒ । अग्ने॑ । त्वम् । र॒क्ष॒स्विनः॑ ॥

Mantra without Swara
घृताहवन दीदिवः प्रति ष्म रिषतो दह। अग्ने त्वं रक्षस्विनः॥

घृतऽआहवन। दीदिऽवः। प्रति। स्म। रिषतः। दह। अग्ने। त्वम्। रक्षस्विनः॥

Ashtak » 1 Adhyay » 1 Varga » 22 Mantra » 5

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
(घृताहवन) जिसमें घी तथा जल क्रियासिद्ध होने के लिये छोड़ा जाता और जो अपने (दीदिवः) शुभ गुणों से पदार्थों को प्रकाश करनेवाला है, (त्वम्) वह (अग्ने) अग्नि (रक्षस्विनः) जिन समूहों में राक्षस अर्थात् दुष्टस्वभाववाले और निन्दा के भरे हुए मनुष्य विद्यमान हैं, तथा जो कि (रिषतः) हिंसा के हेतु दोष और शत्रु हैं, उनका (प्रति दह स्म) अनेक प्रकार से विनाश करता है, हम लोगों को चाहिये कि उस अग्नि को कार्यों में नित्य संयुक्त करें॥५॥
Essence
जो अग्नि इस प्रकार सुगन्ध्यादि गुणवाले पदार्थों से संयुक्त होकर सब दुर्गन्ध आदि दोषों को निवारण करके सब के लिये सुखदायक होता है, वह अच्छे प्रकार काम में लाना चाहिये। ईश्वर का यह वचन सब मनुष्यों को मानना उचित है॥५॥
Subject
उक्त अग्नि फिर भी क्या करता है, सो अगले मन्त्र में प्रकाशित किया है-