Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 1 / Sukta 12 / Mantra 2

191 Sukta
12 Mantra
1/12/2
Devata- अग्निः Rishi- मेधातिथिः काण्वः Chhanda- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
अ॒ग्निम॑ग्निं॒ हवी॑मभिः॒ सदा॑ हवन्त वि॒श्पति॑म्। ह॒व्य॒वाहं॑ पुरुप्रि॒यम्॥

अ॒ग्निम्ऽअ॑ग्निम् । हवी॑मऽभिः । सदा॑ । ह॒व॒न्त॒ । वि॒श्पति॑म् । ह॒व्य॒ऽवाह॑म् । पु॒रु॒ऽप्रि॒यम् ॥

Mantra without Swara
अग्निमग्निं हवीमभिः सदा हवन्त विश्पतिम्। हव्यवाहं पुरुप्रियम्॥

अग्निम्ऽअग्निम्। हवीमऽभिः। सदा। हवन्त। विश्पतिम्। हव्यऽवाहम्। पुरुऽप्रियम्॥

Ashtak » 1 Adhyay » 1 Varga » 22 Mantra » 2

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
जैसे हम लोग (हवीमभिः) ग्रहण करने योग्य उपासनादिकों तथा शिल्पविद्या के साधनों से (पुरुप्रियम्) बहुत सुख करानेवाले (विश्पतिम्) प्रजाओं के पालन हेतु और (हव्यवाहम्) देने-लेने योग्य पदार्थों को देने और इधर-उधर पहुँचानेवाले (अग्निम्) परमेश्वर प्रसिद्ध अग्नि और बिजुली को (वृणीमहे) स्वीकार करतें हैं, वैसे ही तुम लोग भी सदा (हवन्त) उस का ग्रहण करो॥२॥
Essence
इस मन्त्र में लुप्तोपमालङ्कार है। और पिछले मन्त्र से वृणीमहे इस पद की अनुवृत्ति आती है। ईश्वर सब मनुष्यों के लिये उपदेश करता है कि-हे मनुष्यो ! तुम लोगों को विद्युत् अर्थात् बिजुलीरूप तथा प्रत्यक्ष भौतिक अग्नि से कलाकौशल आदि सिद्ध करके इष्ट सुख सदैव भोगने और भुगवाने चाहियें॥२॥
Subject
अब अगले मन्त्र में दो प्रकार के अग्नि का उपदेश किया है-