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Rigveda Mandal 1 / Sukta 118 / Mantra 10

191 Sukta
11 Mantra
1/118/10
Devata- अश्विनौ Rishi- कक्षीवान् Chhanda- निचृत्त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
ता वां॑ नरा॒ स्वव॑से सुजा॒ता हवा॑महे अश्विना॒ नाध॑मानाः। आ न॒ उप॒ वसु॑मता॒ रथे॑न॒ गिरो॑ जुषा॒णा सु॑वि॒ताय॑ यातम् ॥

ता । वा॒म् । न॒रा॒ । सु । अव॑से । सु॒ऽजा॒ता । हवा॑महे । अ॒श्वि॒ना॒ । नाध॑मानाः । आ । नः॒ । उप॑ । वसु॑ऽमता । रथे॑न । गिरः॑ । जु॒षा॒णा । सु॒वि॒ताय॑ । यातम् ॥

Mantra without Swara
ता वां नरा स्ववसे सुजाता हवामहे अश्विना नाधमानाः। आ न उप वसुमता रथेन गिरो जुषाणा सुविताय यातम् ॥

ता। वाम्। नरा। सु। अवसे। सुऽजाता। हवामहे। अश्विना। नाधमानाः। आ। नः। उप। वसुऽमता। रथेन। गिरः। जुषाणा। सुविताय। यातम् ॥ १.११८.१०

Ashtak » 1 Adhyay » 8 Varga » 19 Mantra » 5

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1 Bhashyas
Meaning
हे (सुजाता) श्रेष्ठ विद्याग्रहण करने आदि उत्तम कामों में प्रसिद्ध हुए (गिरः) शुभ वाणियों का (जुषाणा) सेवन और (अश्विना) प्रजा के अङ्गों की पालना करनेवाले (नरा) न्याय में प्रवृत्त करते हुए स्त्री-पुरुषो ! (नाधमानाः) जिनको कि बहुत ऐश्वर्य्य मिला वे हम जिन (वाम्) तुम लोगों को (अवसे) रक्षा आदि के लिये (सु, हवामहे) सुन्दरता से बुलावें (ता) वे तुम (वसुमता) जिसमें प्रशंसित सुवर्ण आदि धन विद्यमान है, उस (रथेन) मनोहर विमान आदि यान से (नः) हम लोगों को (सुविताय) ऐश्वर्य्य के लिये (उप, आ, यातम्) आ मिलो ॥ १० ॥
Essence
प्रजाजनों के स्त्री-पुरुषों से जो राजपुरुष प्रीति को पावें, प्रसन्न हों, वे प्रजाजनों को प्रसन्न करें जिससे एक दूसरे की रक्षा से ऐश्वर्यसमूह नित्य बढ़े ॥ १० ॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहा है ।