Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 1 / Sukta 117 / Mantra 8

191 Sukta
25 Mantra
1/117/8
Devata- अश्विनौ Rishi- कक्षीवान् Chhanda- विराट्त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
यु॒वं श्यावा॑य॒ रुश॑तीमदत्तं म॒हः क्षो॒णस्या॑श्विना॒ कण्वा॑य। प्र॒वाच्यं॒ तद्वृ॑षणा कृ॒तं वां॒ यन्ना॑र्ष॒दाय॒ श्रवो॑ अ॒ध्यध॑त्तम् ॥

यु॒वम् । श्यावा॑य । रुश॑तीम् । अ॒द॒त्त॒म् । म॒हः । क्षो॒णस्य॑ । अ॒श्वि॒ना॒ । कण्वा॑य । प्र॒ऽवाच्य॑म् । तत् । वृ॒ष॒णा॒ । कृ॒तम् । वाम् । यत् । ना॒र्स॒दाय॑ । श्रवः॑ । अ॒धि॒ऽअध॑त्तम् ॥

Mantra without Swara
युवं श्यावाय रुशतीमदत्तं महः क्षोणस्याश्विना कण्वाय। प्रवाच्यं तद्वृषणा कृतं वां यन्नार्षदाय श्रवो अध्यधत्तम् ॥

युवम्। श्यावाय। रुशतीम्। अदत्तम्। महः। क्षोणस्य। अश्विना। कण्वाय। प्रऽवाच्यम्। तत्। वृषणा। कृतम्। वाम्। यत्। नार्सदाय। श्रवः। अधिऽअधत्तम् ॥ १.११७.८

Ashtak » 1 Adhyay » 8 Varga » 14 Mantra » 3

Bhashya

More bhashyas
Meaning
हे (वृषणा) बलवान् (अश्विना) बहुत ज्ञान-विज्ञान की बातें सुने जाने हुए सभा सेनाधीशो ! (युवम्) तुम दोनों (महः) बड़े (क्षोणस्य) पढ़ानेवाले के तीर से (श्यावाय) ज्ञानी (कण्वाय) बुद्धिमान् के लिये (रुशतीम्) प्रकाश करनेवाली विद्या को (अदत्तम्) देवो तथा (यत्) जो (वाम्) तुम दोनों का (प्रवाच्यम्) भली-भाँति कहने योग्य शास्त्र (कृतम्) करने योग्य काम और (श्रवः) सुनना है (तत्) उसको तथा (नार्सदाय) उत्तम-उत्तम व्यवहारों में मनुष्य आदि को पहुँचानेहारे जनों में स्थित होते हुए के लड़के को (अध्यधत्तम्) अपने पर धारण करो ॥ ८ ॥
Essence
सभाध्यक्ष पुरुष से जिस प्रकार का उपदेश अच्छे बुद्धिमानों के प्रति किया जाता हो, वैसा ही सब लोकों के स्वामी के लिये उपदेश करें। ऐसे ही सब मनुष्यों के प्रति वर्त्ताव करना चाहिये ॥ ८ ॥
Subject
फिर यहाँ राजधर्म का उपदेश अगले मन्त्र में किया है ।

We are thankful to https://vedicscriptures.in for providing us a substantial amount of data for this section of the Vedas.