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Rigveda Mandal 1 / Sukta 117 / Mantra 11

191 Sukta
25 Mantra
1/117/11
Devata- अश्विनौ Rishi- कक्षीवान् Chhanda- भुरिक्पङ्क्ति Swara- पञ्चमः
Mantra with Swara
सू॒नोर्माने॑नाश्विना गृणा॒ना वाजं॒ विप्रा॑य भुरणा॒ रद॑न्ता। अ॒गस्त्ये॒ ब्रह्म॑णा वावृधा॒ना सं वि॒श्पलां॑ नासत्यारिणीतम् ॥

सू॒नोः । माने॑न । अ॒श्वि॒ना॒ । गृ॒णा॒ना । वाज॑म् । विप्रा॑य । भु॒र॒णा॒ । रद॑न्ता । अ॒गस्त्ये॑ । ब्रह्म॑णा । व॒वृ॒धा॒ना । सम् । वि॒श्पला॑म् । ना॒स॒त्या॒ । अ॒र्ण्त्म् ॥

Mantra without Swara
सूनोर्मानेनाश्विना गृणाना वाजं विप्राय भुरणा रदन्ता। अगस्त्ये ब्रह्मणा वावृधाना सं विश्पलां नासत्यारिणीतम् ॥

सूनोः। मानेन। अश्विना। गृणाना। वाजम्। विप्राय। भुरणा। रदन्ता। अगस्त्ये। ब्रह्मणा। ववृधाना। सम्। विश्पलाम्। नासत्या। अरिणीतम् ॥ १.११७.११

Ashtak » 1 Adhyay » 8 Varga » 15 Mantra » 1

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1 Bhashyas
Meaning
हे (रदन्ता) अच्छे लिखनेवाले ! (सूनोः) अपने लड़के के समान (मानेन) सत्कार से (विप्राय) अच्छी सुध रखनेवाले बुद्धिमान् जन के लिये (वाजम्) सच्चे बोध को (गृणाना) उपदेश और (भुरणा) सुख धारण करते हुए (नासत्या) सत्य से भरे-पूरे (वावृधाना) वृद्धि को प्राप्त और (ब्रह्मणा) वेद से (अगस्त्ये) जानने योग्य व्यवहारों में उत्तम काम के निमित्त (विश्पलाम्) प्रजाजनों के पालनेवाली विद्या को (अश्विना) प्राप्त होते हुए सभासेनाधीशो ! तुम दोनों मित्रपने से प्रजा के साथ (समरिणीतम्) मिलो ॥ ११ ॥
Essence
इस मन्त्र में लुप्तोपमालङ्कार है। जैसे माता-पिता संतानों और संतान माता-पिताओं, पढ़ानेवाले पढ़नेवालों और पढ़नेवाले पढ़ानेवालों, पति स्त्रियों और स्त्री पतियों तथा मित्र मित्रों को परस्पर प्रसन्न करते हैं, वैसे ही राजा प्रजाजनों और प्रजा राजजनों को निरन्तर प्रसन्न करें ॥ ११ ॥
Subject
फिर बिजुली की विद्या का उपदेश अगले मन्त्र में किया है ।