Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 1 / Sukta 116 / Mantra 7

191 Sukta
25 Mantra
1/116/7
Devata- अश्विनौ Rishi- कक्षीवान् Chhanda- त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
यु॒वं न॑रा स्तुव॒ते प॑ज्रि॒याय॑ क॒क्षीव॑ते अरदतं॒ पुर॑न्धिम्। का॒रो॒त॒राच्छ॒फादश्व॑स्य॒ वृष्ण॑: श॒तं कु॒म्भाँ अ॑सिञ्चतं॒ सुरा॑याः ॥

यु॒वम् । न॒रा॒ । स्तु॒व॒ते । प॒ज्रि॒याय॑ । क॒क्षीव॑ते । अ॒र॒द॒त॒म् । पुर॑म्ऽधिम् । का॒रो॒त॒रात् । श॒फात् । अश्व॑स्य । वृष्णः॑ । श॒तम् । कु॒म्भान् । अ॒सि॒ञ्च॒त॒म् । सुरा॑याः ॥

Mantra without Swara
युवं नरा स्तुवते पज्रियाय कक्षीवते अरदतं पुरन्धिम्। कारोतराच्छफादश्वस्य वृष्ण: शतं कुम्भाँ असिञ्चतं सुरायाः ॥

युवम्। नरा। स्तुवते। पज्रियाय। कक्षीवते। अरदतम्। पुरम्ऽधिम्। कारोतरात्। शफात्। अश्वस्य। वृष्णः। शतम्। कुम्भान्। असिञ्चतम्। सुरायाः ॥ १.११६.७

Ashtak » 1 Adhyay » 8 Varga » 9 Mantra » 2

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
हे (नरा) विनय को पाये हुए सभा सेनापति ! (युवम्) तुम दोनों (पज्रियाय) पदों में प्रसिद्ध होनेवाले (कक्षीवते) अच्छी सिखावट को सीखे और (स्तुवते) स्तुति करते हुए विद्यार्थी के लिये (पुरन्धिम्) बहुत प्रकार की बुद्धि और अच्छे मार्ग को (अरदतम्) चिन्ताओं तथा (वृष्णः) बलवान् (अश्वस्य) घोड़े के समान अग्नि संबन्धी कलाघर के (कारोतरात्) जिससे व्यवहारों को करते हुए शिल्पी लोग तर्क के साथ पार होते हैं उस (शफात्) खुर के समान जल सींचने के स्थान से (सुरायाः) सींचे हुए रस से भरे (शतम्) सौ (कुम्भान्) घड़ों को ले (असिञ्चतम्) सींचा करो ॥ ७ ॥
Essence
जो शास्त्रवेत्ता अध्यापक विद्वान् जिस शान्तिपूर्वक इन्द्रियों को विषयों से रोकने आदि गुणों से युक्त सज्जन विद्यार्थी के लिये शिल्पकार्य्य अर्थात् कारीगरी सिखाने को हाथ की चतुराईयुक्त बुद्धि उत्पन्न कराते अर्थात् सिखाते हैं वह प्रशंसायुक्त शिल्पी अर्थात् कारीगर होकर रथ आदि को बना सकता है। शिल्पीजन जिस यान अर्थात् उत्तम विमान आदि रथ में जलघर से जल सींच और नीचे आग जलाकर भाफों से उसे चलाते हैं, उससे वे घोड़े से जैसे वैसे बिजुली आदि पदार्थों से शीघ्र एक देश से दूसरे देश को जा सकते हैं ॥ ७ ॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहा है ।