Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 1 / Sukta 116 / Mantra 14

191 Sukta
25 Mantra
1/116/14
Devata- अश्विनौ Rishi- कक्षीवान् Chhanda- निचृत्त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
आ॒स्नो वृक॑स्य॒ वर्ति॑काम॒भीके॑ यु॒वं न॑रा नासत्यामुमुक्तम्। उ॒तो क॒विं पु॑रुभुजा यु॒वं ह॒ कृप॑माणमकृणुतं वि॒चक्षे॑ ॥

आ॒स्नः । वृक॑स्य । वर्ति॑काम् । अ॒भीके॑ । यु॒वम् । न॒रा॒ । ना॒स॒त्या॒ । अ॒मु॒मु॒क्त॒म् । उ॒तो इति॑ । क॒विम् । पु॒रु॒ऽभु॒जा॒ । यु॒वम् । ह॒ । कृप॑माणम् । अ॒कृ॒णु॒त॒म् । वि॒ऽचक्षे॑ ॥

Mantra without Swara
आस्नो वृकस्य वर्तिकामभीके युवं नरा नासत्यामुमुक्तम्। उतो कविं पुरुभुजा युवं ह कृपमाणमकृणुतं विचक्षे ॥

आस्नः। वृकस्य। वर्तिकाम्। अभीके। युवम्। नरा। नासत्या। अमुमुक्तम्। उतो इति। कविम्। पुरुऽभुजा। युवम्। ह। कृपमाणम्। अकृणुतम्। विऽचक्षे ॥ १.११६.१४

Ashtak » 1 Adhyay » 8 Varga » 10 Mantra » 4

Bhashya

More bhashyas
Meaning
हे (पुरुभुजा) बहुत जनों को सुख का भोग कराने (नासत्या) झूठ से अलग रहने (नरा) और सुखों को पहुँचानेहारे सभा सेनापतियो ! (युवम्) तुम दोनों (अभीके) चाहे हुए व्यवहार में (वृकस्य) भेड़िया के (आस्नः) मुख से (वर्त्तिकाम्) चिरौटी के समान सब मनुष्यों को अविद्याजन्य दुःख से (अमुमुक्तम्) छुड़ाओ (उतो) और (ह) भी (युवम्) तुम दोनों सब विद्याओं को (विचक्षे) विख्यात करने को (कृपमाणम्) कृपा करनेवाले (कविम्) विद्या के पारंगत पुरुष को (अकृणुतम्) सिद्ध करो ॥ १४ ॥
Essence
मनुष्यों को चाहिये कि सुखरूप सबके चाहे हुए विद्या ग्रहण करने के व्यवहार में सब मनुष्यों को प्रवृत्त करके जिसका दुःख फल है उस अन्यायरूप काम से निवृत्त करके उन सब प्राणियों पर कृपा कर सुख देवें ॥ १४ ॥
Subject
फिर मनुष्यों को कैसे वर्त्तना चाहिये, यह विषय अगले मन्त्र में कहा है ।

We are thankful to https://vedicscriptures.in for providing us a substantial amount of data for this section of the Vedas.