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Rigveda Mandal 1 / Sukta 114 / Mantra 8

191 Sukta
11 Mantra
1/114/8
Devata- रुद्रः Rishi- कुत्स आङ्गिरसः Chhanda- विराड्जगती Swara- निषादः
Mantra with Swara
मा न॑स्तो॒के तन॑ये॒ मा न॑ आ॒यौ मा नो॒ गोषु॒ मा नो॒ अश्वे॑षु रीरिषः। वी॒रान्मा नो॑ रुद्र भामि॒तो व॑धीर्ह॒विष्म॑न्त॒: सद॒मित्त्वा॑ हवामहे ॥

मा । नः॒ । तो॒के । तन॑ये । मा । नः॒ । आ॒यौ । मा । नः॒ । गोषु॑ । मा । नः॒ । अश्वे॑षु । रि॒रि॒षः॒ । वी॒रान् । मा । नः॒ । रु॒द्र॒ । भा॒मि॒तः । व॒धीः॒ । ह॒विष्म॑न्तः । सद॑म् । इत् । त्वा॒ । ह॒वा॒म॒हे॒ ॥

Mantra without Swara
मा नस्तोके तनये मा न आयौ मा नो गोषु मा नो अश्वेषु रीरिषः। वीरान्मा नो रुद्र भामितो वधीर्हविष्मन्त: सदमित्त्वा हवामहे ॥

मा। नः। तोके। तनये। मा। नः। आयौ। मा। नः। गोषु। मा। नः। अश्वेषु। रिरिषः। वीरान्। मा। नः। रुद्र। भामितः। वधीः। हविष्मन्तः। सदम्। इत्। त्वा। हवामहे ॥ १.११४.८

Ashtak » 1 Adhyay » 8 Varga » 6 Mantra » 3

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1 Bhashyas
Meaning
हे (रुद्र) दुष्टों को रुलानेहारे सभापति ! (हविष्मन्तः) जिनके प्रशंसायुक्त संसार के उपकार करने के काम हैं, वे हम लोग जिस कारण (सदम्) स्थिर वर्त्तमान ज्ञान को प्राप्त (त्वाम्, इत्) आप ही को (हवामहे) अपना करते हैं, इससे (भामितः) क्रोध को प्राप्त हुए आप (नः) हम लोगों के (तोके) उत्पन्न हुए बालक वा (तनये) बालिकाईं से जो ऊपर है, उस बालक में (मा) (रीरिषः) घात मत करो (नः) हम लोगों के (आयौ) जीवन विषय में (मा) मत हिंसा करो (नः) हम लोगों के (गोषु) गौ आदि पशुसंघात में (मा) मत घात करो (नः) हम लोगों के (अश्वेषु) घोड़ों में (मा) घात मत करो (नः) हमारे (वीरान्) वीरों को (मा) मत (वधीः) मारो ॥ ८ ॥
Essence
क्रोध को प्राप्त हुए सज्जन राजपुरुषों को किसी का अन्याय से हनन न करना चाहिये और गौ आदि पशुओं की सदा रक्षा करनी चाहिये। प्रजाजनों को भी राजा के आश्रय से ही निरन्तर आनन्द करना चाहिये और सबों को मिलकर ईश्वर की ऐसी प्रार्थना करनी चाहिये कि हे परमेश्वर ! आपकी कृपा से हम लोग बाल्यावस्था में विवाह आदि बुरे काम करके पुत्रादिकों का विनाश कभी न करें और वे पुत्र आदि भी हम लोगों के विरुद्ध काम को न करें तथा संसार का उपकार करने हारे गौ आदि पशुओं का कभी विनाश न करें ॥ ८ ॥
Subject
फिर राजजन कैसे वर्त्तें, इस विषय को अगले मन्त्र में कहा है ।