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Rigveda Mandal 1 / Sukta 114 / Mantra 7

191 Sukta
11 Mantra
1/114/7
Devata- रुद्रः Rishi- कुत्स आङ्गिरसः Chhanda- निचृज्जगती Swara- निषादः
Mantra with Swara
मा नो॑ म॒हान्त॑मु॒त मा नो॑ अर्भ॒कं मा न॒ उक्ष॑न्तमु॒त मा न॑ उक्षि॒तम्। मा नो॑ बधीः पि॒तरं॒ मोत मा॒तरं॒ मा न॑: प्रि॒यास्त॒न्वो॑ रुद्र रीरिषः ॥

मा । नः॒ । म॒हान्त॑म् । उ॒त । मा । नः॒ । अ॒र्भ॒कम् । मा । नः॒ । उक्ष॑न्तम् । उ॒त । मा । नः॒ । उ॒क्षि॒तम् । मा । नः॒ । व॒धीः॒ । पि॒तर॑म् । मा । उ॒त । मा॒तर॑म् । मा । नः॒ । प्रि॒याः । त॒न्वः॑ । रु॒द्र॒ । रि॒रि॒षः॒ ॥

Mantra without Swara
मा नो महान्तमुत मा नो अर्भकं मा न उक्षन्तमुत मा न उक्षितम्। मा नो बधीः पितरं मोत मातरं मा न: प्रियास्तन्वो रुद्र रीरिषः ॥

मा। नः। महान्तम्। उत। मा। नः। अर्भकम्। मा। नः। उक्षन्तम्। उत। मा। नः। उक्षितम्। मा। नः। बधीः। पितरम्। मा। उत। मातरम्। मा। नः। प्रियाः। तन्वः। रुद्र। रिरिषः ॥ १.११४.७

Ashtak » 1 Adhyay » 8 Varga » 6 Mantra » 2

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
(रुद्र) न्यायाधीश दुष्टों को रुलानेहारे सभापति (नः) हम लोगों में से (महान्तम्) बुड्ढे वा पढ़े-लिखे मनुष्य को (मा) मत (बधीः) मारो (उत) और (नः) हमारे (अर्भकम्) बालक को (मा) मत मारो (नः) हमारे (उक्षन्तम्) स्त्रीसङ्ग करने में समर्थ युवावस्था से परिपूर्ण मनुष्य को (मा) मत मारो (उत) और (नः) हमारे (उक्षितम्) वीर्यसेचन से स्थित हुए गर्भ को (मा) मत मारो (नः) हम लोगों के (पितरम्) पालने और उत्पन्न करनेहारे पिता वा उपदेश करनेवाले को (मा) मत मारो (उत) और (मातरम्) मान सन्मान और उत्पन्न करनेहारी माता वा विदुषी स्त्री को (मा) मत मारो (नः) हम लोगों की (प्रियाः) स्त्री आदि के पियारे (तन्वः) शरीरों को (मा) मत मारो और अन्यायकारी दुष्टों को (रीरिषः) मारो ॥ ७ ॥
Essence
हे मनुष्यो ! जैसे ईश्वर पक्षपात को छोड़ के धार्मिक सज्जनों को उत्तम कर्मों के फल देने से सुख देता और पापियों को पाप का फल देने से पीड़ा देता है, वैसे ही तुम लोग भी अच्छा यत्न करो ॥ ७ ॥
Subject
अब न्यायाधीश कैसे वर्त्ते, यह विषय अगले मन्त्र में कहा है ।