Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 1 / Sukta 113 / Mantra 7

191 Sukta
20 Mantra
1/113/7
Devata- उषाः द्वितीयस्यार्द्धर्चस्य रात्रिरपि Rishi- कुत्स आङ्गिरसः Chhanda- विराट्त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
ए॒षा दि॒वो दु॑हि॒ता प्रत्य॑दर्शि व्यु॒च्छन्ती॑ युव॒तिः शु॒क्रवा॑साः। विश्व॒स्येशा॑ना॒ पार्थि॑वस्य॒ वस्व॒ उषो॑ अ॒द्येह सु॑भगे॒ व्यु॑च्छ ॥

ए॒षा । दि॒वः । दु॒हि॒ता प्रति॑ । अ॒द॒र्शि॒ । वि॒ऽउ॒च्छन्ती॑ । यु॒व॒तिः । शु॒क्रऽवा॑साः । विश्व॑स्य । ईशा॑ना । पार्थि॑वस्य । वस्वः॑ । उषः॑ । अ॒द्य । इ॒ह । सु॒ऽभ॒गे॒ । वि । उ॒च्छ॒ ॥

Mantra without Swara
एषा दिवो दुहिता प्रत्यदर्शि व्युच्छन्ती युवतिः शुक्रवासाः। विश्वस्येशाना पार्थिवस्य वस्व उषो अद्येह सुभगे व्युच्छ ॥

एषा। दिवः। दुहिता प्रति। अदर्शि। विऽउच्छन्ती। युवतिः। शुक्रऽवासाः। विश्वस्य। ईशाना। पार्थिवस्य। वस्वः। उषः। अद्य। इह। सुऽभगे। वि। उच्छ ॥ १.११३.७

Ashtak » 1 Adhyay » 8 Varga » 2 Mantra » 2

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
जैसे (शुक्रवासाः) शुद्ध पराक्रमयुक्त (विश्वस्य) समस्त (पार्थिवस्य) पृथिवी में प्रसिद्ध हुए (वस्वः) धन की (ईशाना) अच्छे प्रकार सिद्ध करानेवाली (व्युच्छन्ती) और नाना प्रकार के अन्धकारों को दूर करती हुई (एषा) यह (दिवः) सूर्य्य की (युवतीः) ज्वान अर्थात् अति पराक्रमवाली (दुहिता) पुत्री प्रभात वेला (प्रत्यदर्शि) बार-बार देख पड़ती है, वैसे हे (सुभगे) उत्तम भाग्यवती (उषः) सुख में निवास करनेहारी विदुषी ! (अद्य) आज तू (इह) यहाँ (व्युच्छ) दुःखों को दूर कर ॥ ७ ॥
Essence
इस मन्त्र में वाचकलुप्तोपमालङ्कार है। जब ब्रह्मचर्य किया हुआ सन्मार्गस्थ ज्वान विद्वान् पुरुष अपने तुल्य, अपने विद्यायुक्त, ब्रह्मचारिणी, सुन्दर रूप, बल, पराक्रमवाली, साध्वी अच्छे स्वभावयुक्त सुख देनेहारी, युवति अर्थात् बीसवें वर्ष से चौबीसवें वर्ष की आयु युक्त कन्या से विवाह करे, तभी विवाहित स्त्री-पुरुष उषा के समान सुप्रकाशित होकर सब सुखों को प्राप्त होवें ॥ ७ ॥
Subject
अब उषा के दृष्टान्त से विदुषी स्त्री के व्यवहार को अगले मन्त्र में कहा है ।