Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 1 / Sukta 113 / Mantra 15

191 Sukta
20 Mantra
1/113/15
Devata- उषाः द्वितीयस्यार्द्धर्चस्य रात्रिरपि Rishi- कुत्स आङ्गिरसः Chhanda- भुरिक्पङ्क्ति Swara- पञ्चमः
Mantra with Swara
आ॒वह॑न्ती॒ पोष्या॒ वार्या॑णि चि॒त्रं के॒तुं कृ॑णुते॒ चेकि॑ताना। ई॒युषी॑णामुप॒मा शश्व॑तीनां विभाती॒नां प्र॑थ॒मोषा व्य॑श्वैत् ॥

आ॒ऽवह॑न्ती । पोष्या॑ । वार्या॑णि । चि॒त्रम् । के॒तुम् । कृ॒णु॒ते॒ । चेकि॑ताना । ई॒युषी॑णाम् । उ॒प॒ऽमा । शश्व॑तीनाम् । वि॒ऽभा॒ती॒नाम् । प्र॒थ॒मा । उ॒षाः । वि । अ॒श्वै॒त् ॥

Mantra without Swara
आवहन्ती पोष्या वार्याणि चित्रं केतुं कृणुते चेकिताना। ईयुषीणामुपमा शश्वतीनां विभातीनां प्रथमोषा व्यश्वैत् ॥

आऽवहन्ती। पोष्या। वार्याणि। चित्रम्। केतुम्। कृणुते। चेकिताना। ईयुषीणाम्। उपऽमा। शश्वतीनाम्। विऽभातीनाम्। प्रथमा। उषाः। वि। अश्वैत् ॥ १.११३.१५

Ashtak » 1 Adhyay » 8 Varga » 3 Mantra » 5

Bhashya

More bhashyas
Meaning
हे स्त्री लोगो ! तुम जैसे (उषाः) प्रातर्वेला (पोष्या) पुष्टि कराने और (वार्याणि) स्वीकार करने योग्य धनादि पदार्थों को (आवहन्ती) प्राप्त कराती और (चेकिताना) अत्यन्त चिताती हुई (चित्रम्) अद्भुत (केतुम्) किरण को (कृणुते) करती अर्थात् प्रकाशित करती है (विभातीनाम्) विशेष कर प्रकाशित करती हुई सूर्य्यकान्तियों और (ईयुषीणाम्) चलती हुई (शश्वतीनाम्) अनादि रूप घड़ियों की (प्रथमा) पहिली (उपमा) दृष्टान्तरूप (व्यश्वैत्) व्याप्त होती है, वैसे ही शुभ गुण कर्मों से (चरत) विचरा करो ॥ १५ ॥
Essence
हे मनुष्यो ! तुम लोग यह निश्चित जानो कि जैसे प्रातःकाल से आरम्भ करके कर्म उत्पन्न होते हैं, वैसे स्त्रियों के आरम्भ से घर के कर्म हुआ करते हैं ॥ १५ ॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहा है ।

We are thankful to https://vedicscriptures.in for providing us a substantial amount of data for this section of the Vedas.