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Rigveda Mandal 1 / Sukta 109 / Mantra 2

191 Sukta
8 Mantra
1/109/2
Devata- इन्द्राग्नी Rishi- कुत्स आङ्गिरसः Chhanda- त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
अश्र॑वं॒ हि भू॑रि॒दाव॑त्तरा वां॒ विजा॑मातुरु॒त वा॑ घा स्या॒लात्। अथा॒ सोम॑स्य॒ प्रय॑ती यु॒वभ्या॒मिन्द्रा॑ग्नी॒ स्तोमं॑ जनयामि॒ नव्य॑म् ॥

अश्र॑वम् । हि । भू॒रि॒दाव॑त्ऽतरा । वा॒म् । विऽजा॑मातुः । उ॒त । वा॒ । घ॒ । स्या॒लात् । अथ॑ । सोम॑स्य । प्रऽय॑ती । यु॒वऽभ्या॑म् । इन्द्रा॑ग्नी॒ इति॑ । स्तोम॑म् । ज॒न॒या॒मि॒ । नव्य॑म् ॥

Mantra without Swara
अश्रवं हि भूरिदावत्तरा वां विजामातुरुत वा घा स्यालात्। अथा सोमस्य प्रयती युवभ्यामिन्द्राग्नी स्तोमं जनयामि नव्यम् ॥

अश्रवम्। हि। भूरिदावत्ऽतरा। वाम्। विऽजामातुः। उत। वा। घ। स्यालात्। अथ। सोमस्य। प्रऽयती। युवऽभ्याम्। इन्द्राग्नी इति। स्तोमम्। जनयामि। नव्यम् ॥ १.१०९.२

Ashtak » 1 Adhyay » 7 Varga » 28 Mantra » 2

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1 Bhashyas
Meaning
जो (वाम्) ये (भूरिदावत्तरा) अतीव बहुत से धन की प्राप्ति करानेहारे (इन्द्राग्नी) बिजुली और भौतिक अग्नि हैं वा जो उक्त इन्द्राग्नी (विजामातुः) विरोधी जमाई (स्यालात्) साले से (उत, वा) अथवा और (घ) अन्यों जनों से धनों को दिलाते हैं यह मैं (अश्रवम्) सुन चुका हूँ (अथ, हि) अभि (युवभ्याम्) इनसे (सोमस्य) ऐश्वर्य्य अर्थात् धनादि पदार्थों की प्राप्ति करनेवाले व्यवहार के (प्रयती) अच्छे प्रकार देने के लिये (नव्यम्) नवीन (स्तोमम्) गुण के प्रकाश को मैं (जनयामि) प्रकट करता हूँ ॥ २ ॥
Essence
सब मनुष्यों को बिजुली आदि पदार्थों के गुणों का ज्ञान और उनके अच्छे प्रकार कार्य में युक्त करने से नवीन-नवीन कार्य्य की सिद्धि करनेवाले कलायन्त्र आदि का विधानकर अनेक कामों को बनाकर धर्म, अर्थ और अपनी कामना की सिद्धि करनी चाहिये ॥ २ ॥
Subject
फिर वे कैसे हैं, यह विषय अगले मन्त्र में कहा है ।