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Rigveda Mandal 1 / Sukta 104 / Mantra 8

191 Sukta
9 Mantra
1/104/8
Devata- इन्द्र: Rishi- कुत्स आङ्गिरसः Chhanda- निचृत्त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
मा नो॑ वधीरिन्द्र॒ मा परा॑ दा॒ मा न॑: प्रि॒या भोज॑नानि॒ प्र मो॑षीः। आ॒ण्डा मा नो॑ मघवञ्छक्र॒ निर्भे॒न्मा न॒: पात्रा॑ भेत्स॒हजा॑नुषाणि ॥

मा । नः॒ । व॒धीः॒ । इ॒न्द्र॒ । मा । परा॑ । दाः॒ । मा । नः॒ । प्रि॒या । भोज॑नानि । प्र । मो॒षीः॒ । आ॒ण्डा । मा । नः॒ । म॒घ॒ऽव॒न् । श॒क्र॒ । निः । भे॒त् । मा । नः॒ । पात्रा॑ । भे॒त् । स॒हऽजा॑नुषाणि ॥

Mantra without Swara
मा नो वधीरिन्द्र मा परा दा मा न: प्रिया भोजनानि प्र मोषीः। आण्डा मा नो मघवञ्छक्र निर्भेन्मा न: पात्रा भेत्सहजानुषाणि ॥

मा। नः। वधीः। इन्द्र। मा। परा। दाः। मा। नः। प्रिया। भोजनानि। प्र। मोषीः। आण्डा। मा। नः। मघऽवन्। शक्र। निः। भेत्। मा। नः। पात्रा। भेत्। सहऽजानुषाणि ॥ १.१०४.८

Ashtak » 1 Adhyay » 7 Varga » 19 Mantra » 3

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1 Bhashyas
Meaning
हे (मघवन्) प्रशंसित धनयुक्त (शक्र) सब व्यवहार के करने को समर्थ (इन्द्र) शत्रुओं को विनाश करनेवाले सभा के स्वामी ! आप (नः) हम प्रजास्थ मनुष्यों को (मा, वधीः) मत मारिये (मा, परा, दाः) अन्याय से दण्ड मत दीजिये, स्वाभाविक काम और (नः) हम लोगों के (सहजानुषाणि) जो जन्म से सिद्ध उनके वर्त्तमान (प्रिया) पियारे (भोजनानि) भोजन पदार्थों को (मा, प्र मोषीः) मत चोरिये, (नः) हमारे (आण्डा) अण्डा के समान जो गर्भ में स्थित हैं उन प्राणियों को (मा, निर्भेत्) विदीर्ण मत कीजिये, (नः) हम लोगों के (पात्रा) सोने चाँदी के पात्रों को (मा, भेत्) मत बिगाड़िये ॥ ८ ॥
Essence
हे सभापति ! तू जैसे अन्याय से किसी को न मारके किसी भी धार्मिक सज्जन से विमुख न होकर चोरी-चपारी आदि दोषरहित परमेश्वर दया का प्रकाश करता है, वैसे ही अपने राज्य के काम करने में प्रवृत्त हो, ऐसे वर्त्ताव के विना राजा से प्रजा सन्तोष नहीं पाती ॥ ८ ॥
Subject
फिर इनको कैसी प्रतिज्ञा करनी चाहिये, यह विषय अगले मन्त्र में कहा है ।