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Rigveda Mandal 1 / Sukta 102 / Mantra 6

191 Sukta
11 Mantra
1/102/6
Devata- इन्द्र: Rishi- कुत्स आङ्गिरसः Chhanda- निचृज्जगती Swara- निषादः
Mantra with Swara
गो॒जिता॑ बा॒हू अमि॑तक्रतुः सि॒मः कर्म॑न्कर्मञ्छ॒तमू॑तिः खजंक॒रः। अ॒क॒ल्प इन्द्र॑: प्रति॒मान॒मोज॒साथा॒ जना॒ वि ह्व॑यन्ते सिषा॒सव॑: ॥

गो॒ऽजिता॑ । बा॒हू इति॑ । अमि॑तऽक्रतुः । सि॒मः । कर्म॑न्ऽकर्मन् । श॒तऽमू॑र्तिः । ख॒ज॒म्ऽक॒रः । अ॒क॒ल्पः । इन्द्रः॑ । प्र॒ति॒ऽमान॑म् । ओज॑सा । अथ॑ । जनाः॑ । वि । ह्व॒य॒न्ते॒ । सि॒सा॒सवः॑ ॥

Mantra without Swara
गोजिता बाहू अमितक्रतुः सिमः कर्मन्कर्मञ्छतमूतिः खजंकरः। अकल्प इन्द्र: प्रतिमानमोजसाथा जना वि ह्वयन्ते सिषासव: ॥

गोऽजिता। बाहू इति। अमितऽक्रतुः। सिमः। कर्मन्ऽकर्मन्। शतऽमूतिः। खजम्ऽकरः। अकल्पः। इन्द्रः। प्रतिऽमानम्। ओजसा। अथ। जनाः। वि। ह्वयन्ते। सिसासवः ॥ १.१०२.६

Ashtak » 1 Adhyay » 7 Varga » 15 Mantra » 1

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1 Bhashyas
Meaning
हे सभापति ! जिन आपकी (गोजिता) पृथिवी की जितानेवाली (बाहू) अत्यन्त बल पराक्रमयुक्त भुजा (अथ) इसके अनन्तर जो आप (इन्द्रः) अनेक ऐश्वर्य्ययुक्त (ओजसा) बल से (कर्मन् कर्मन्) प्रत्येक को काम में (अमितक्रतुः) अतुल बुद्धिवाले (अकल्पः) और बड़े-बड़े समर्थ जनों से अधिक (सिमः) व्यवस्था से शत्रुओं के बाँधने और (खजङ्करः) संग्राम करनेवाले (शतमूतिः) जिनकी सैकड़ों रक्षा आदि क्रिया है। (प्रतिमानम्) जिनको अत्यन्त सामर्थ्यवालों की उपमा दी जाती है, उन आपको (सिषासवः) सेवन करने की इच्छा करनेवाले (जनाः) विद्वान् जन (वि, ह्वयन्ते) चाहते हैं ॥ ६ ॥
Essence
मनुष्यों को चाहिये कि जो सर्वथा समर्थ, प्रत्येक काम के करने को जानता, औरों से न जीतने योग्य, आप सबको जीतनेवाला, सबके चाहने योग्य और अनुपम मनुष्य हो, उसको सेनाधिपति करके विजय आदि कामों को साधें ॥ ६ ॥
Subject
फिर वह सेनापति कैसा हो, इस विषय को अगले मन्त्र में कहा है ।