Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 1 / Sukta 101 / Mantra 7

191 Sukta
11 Mantra
1/101/7
Devata- इन्द्र: Rishi- कुत्स आङ्गिरसः Chhanda- विराड्जगती Swara- निषादः
Mantra with Swara
रु॒द्राणा॑मेति प्र॒दिशा॑ विचक्ष॒णो रु॒द्रेभि॒र्योषा॑ तनुते पृ॒थु ज्रय॑:। इन्द्रं॑ मनी॒षा अ॒भ्य॑र्चति श्रु॒तं म॒रुत्व॑न्तं स॒ख्याय॑ हवामहे ॥

रु॒द्रा॒णा॑म् । ए॒ति॒ । प्र॒ऽदिशा॑ । वि॒ऽच॒क्ष॒णः । रु॒द्रेभिः॑ । योषा॑ । त॒नु॒ते॒ । पृ॒थु । ज्रयः॑ । इन्द्र॑म् । म॒नी॒षा । अ॒भि । अ॒र्च॒ति॒ । श्रु॒तम् । म॒रुत्व॑न्तम् । स॒ख्याय॑ । ह॒वा॒म॒हे॒ ॥

Mantra without Swara
रुद्राणामेति प्रदिशा विचक्षणो रुद्रेभिर्योषा तनुते पृथु ज्रय:। इन्द्रं मनीषा अभ्यर्चति श्रुतं मरुत्वन्तं सख्याय हवामहे ॥

रुद्राणाम्। एति। प्रऽदिशा। विऽचक्षणः। रुद्रेभिः। योषा। तनुते। पृथु। ज्रयः। इन्द्रम्। मनीषा। अभि। अर्चति। श्रुतम्। मरुत्वन्तम्। सख्याय। हवामहे ॥ १.१०१.७

Ashtak » 1 Adhyay » 7 Varga » 13 Mantra » 1

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
(विचक्षणः) प्रशंसित चतुराई आदि गुणों से युक्त विद्वान् (रुद्राणाम्) प्राणों के समान बुरे-भलों को रुलाते हुए विद्वानों के (प्रदिशा) ज्ञानमार्ग से (पृथु) विस्तृत (ज्रयः) प्रताप को (एति) प्राप्त होता है और (रुद्रेभिः) प्राण वा छोटे-छोटे विद्यार्थियों के साथ (योषा) विद्या से मिली और मूर्खपन से अलग हुई स्त्री उसको (तनुते) विस्तारती है, इससे जो विचक्षण विद्वान् (मनीषा) प्रशंसित बुद्धि से (श्रुतम्) प्रख्यात (इन्द्रम्) शाला आदि के अध्यक्ष का (अभ्यर्चति) सब ओर से सत्कार करता उस (मरुत्वन्तम्) अपने समीप पढ़ानेवालों को रखनेवाले को (सख्याय) मित्रपन के लिये हम लोग (हवामहे) स्वीकार करते हैं ॥ ७ ॥
Essence
जिन मनुष्यों से प्राणायामों से प्राणों को, सत्कार से श्रेष्ठों और तिरस्कार से दुष्टों को वश में कर समस्त विद्याओं को फैलाकर परमेश्वर वा अध्यापक का अच्छे प्रकार मान-सत्कार करके उपकार के साथ सब प्राणी सत्कारयुक्त किये जाते हैं, वे सुखी होते हैं ॥ ७ ॥
Subject
फिर वह कैसा हो, इस विषय को अगले मन्त्र में कहा है ।