Adhyay 9

Manusmriti

Shloka 88 Chapter Nine

Adhyay 9
Shloka 88

Chapter Nine

Subject: राजधर्मान्तर्गत व्यवहार - निर्णय

336 Shloka
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Adhyay 9 Shloka 88
Shloka
उत्कृष्टायाभिरूपाय वराय सदृशाय च। अप्राप्तां अपि तां तस्मै कन्यां दद्याद्यथाविधि॥

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1 Bhashyas
Meaning
यदि माता-पिता कन्या का विवाह करना चाहें तो (उत्कृष्टाय + अभि रूपाय सहशाय वराय) अति उत्कृष्ट, शुभगुण, कर्म, स्वभाव वाला कन्या के सदृश रूप-लावण्य आदि गुणयुक्त वर ही को चाहें (ताम् अप्राप्तां कन्याम् + अपि) वह कन्या माता की छह पीढी के भीतर भी हो तथापि (तस्मै दद्यात्) उसी को कन्या देना, अन्य को कभी न देना कि जिससे दोनों अति प्रसन्न होकर गृहाश्रम की उन्नति और उत्तम सन्तानों की उत्पत्ति करें॥८८॥(सं० वि० वि० सं०)