Adhyay 9

Manusmriti

Shloka 75 Chapter Nine

Adhyay 9
Shloka 75

Chapter Nine

Subject: राजधर्मान्तर्गत व्यवहार - निर्णय

336 Shloka
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Adhyay 9 Shloka 75
Shloka
विधाय प्रोषिते वृत्तिं जीवेन्नियमं आस्थिता। प्रोषिते त्वविधायैव जीवेच्छिल्पैरगर्हितैः॥

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1 Bhashyas
Meaning
(वृत्ति विधाय प्रोषिते) जीविका का प्रबन्ध करके पति के परदेश जाने पर (नियमम् + प्रास्यिता जोवेत्) स्त्री अपने नियमों का पालन करती हुई जीवनयात्रा चलाये (अविधाय+एव तु प्रोषिते) यदि पति विना जीविका का प्रबन्ध किये परदेश चला जाये तो (अर्गाहितैः शिल्पै: जोवेत्) प्रनिन्दित शिल्पकार्यों [सिलाई करना, बुनना, कातना आदि] को करके अपनी जोवनयात्रा चलाये ॥७५॥