Adhyay 9

Manusmriti

Shloka 59 Chapter Nine

Adhyay 9
Shloka 59

Chapter Nine

Subject: राजधर्मान्तर्गत व्यवहार - निर्णय

336 Shloka
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Adhyay 9 Shloka 59
Shloka
देवराद्वा सपिण्डाद्वा स्त्रिया सम्यङ्नियुक्तया। प्रजेप्सिताआधिगन्तव्या संतानस्य परिक्षये॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
सपिंड अर्थात् पति की छः पीढ़ियों में पति का छोटा वा वड़ा भाई, अथवा स्वजातीय तथा अपने से उत्तम जातिस्थ पुरुष से विधवा स्त्री का नियोग होना चाहिए । परन्तु जो वह मृतस्त्री पुरुष और विधवा स्त्रो सन्तानोत्पत्ति की इच्छा करती हो तो नियोग होना उचित है और जब सन्तान का सर्वथा क्षय हो तब नियोग होवे । (स० प्र० चतुर्थसमु०) (सन्तानस्य परिक्षये) पति से सन्तान न होने पर अथवा किसी भी प्रकार से सन्तान का अभाव होने पर (सम्यक नियुक्तया स्त्रिया) ठीक-ढंग से [परिवार और समाज में विवाहवत् प्रसिद्धिपूर्वक] नियोग के लिये नियुक्त स्त्री को (देवरात् वा सपिंडात् वा) देवर-स्वजातीय या अपने से उत्तम वर्णस्थ पुरुष से अथवा पति की छः पीढ़ियों में पति के छोटे या बड़े भाई से (ईप्सिता प्रजा अधिगन्तव्या) इच्छित सन्तान प्राप्त कर लेनी चाहिए अर्थात् जितनी सन्तान अभीष्ट हो उतनी प्राप्त कर ले॥५९॥