Adhyay 9

Manusmriti

Shloka 52 Chapter Nine

Adhyay 9
Shloka 52

Chapter Nine

Subject: राजधर्मान्तर्गत व्यवहार - निर्णय

336 Shloka
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Adhyay 9 Shloka 52
Shloka
फलं त्वनभिसंधाय क्षेत्रिणां बीजिनां तथा। प्रत्यक्षं क्षेत्रिणां अर्थो बीजाद्योनिर्गलीयसी॥

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1 Bhashyas
Meaning
(क्षेत्रिरणां तथा वोजिनाम्) खेतवालों और बीजवालों में (फलं तु अनभिसंधाय) फल के लेने के विषय में बिना निश्चय हुए 'कि इस क्षेत्र में उत्पन होने वाला अन्न, सन्तान आदि फल किसका होगा' बीज वपन करने पर (प्रत्यक्ष क्षेत्रिरणाम् +अर्थ:) वह स्पष्टरूप से क्षेत्रस्वामी का फल या उपलब्धि होती है, क्योंकि (बीजात् योनिः गरीयसी) ऐसी स्थिति में बीज से योनि बलवती होती है ॥५२॥