Adhyay 9

Manusmriti

Shloka 41 Chapter Nine

Adhyay 9
Shloka 41

Chapter Nine

Subject: राजधर्मान्तर्गत व्यवहार - निर्णय

336 Shloka
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Adhyay 9 Shloka 41
Shloka
तत्प्राज्ञेन विनीतेन ज्ञानविज्ञानवेदिना। आयुष्कामेन वप्तव्यं न जातु परयोषिति॥

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Meaning
(तत्) वह बीज (प्राज्ञेन) बुद्धिमान् (विनीतेन) विनम्र (ज्ञानविज्ञानवेदिना) ज्ञान-विज्ञान के दाता (आयुष्कामेन) दीर्घायु चाहने वाले व्यक्ति को (जातु) कभी भी (परयोषिति न वप्तव्यम्) परस्त्री में नहीं बोना चाहिए अर्थात् परस्त्री से सम्पर्क कर व्यभिचार आदि द्वारा अपने वीर्यरूपी बीज को व्यर्थ में नष्ट नहीं करना चाहिए॥४१॥