Adhyay 9

Manusmriti

Shloka 335 Chapter Nine

Adhyay 9
Shloka 335

Chapter Nine

Subject: राजधर्मान्तर्गत व्यवहार - निर्णय

336 Shloka
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Adhyay 9 Shloka 335
Shloka
शुचिरुत्कृष्टशुश्रूषुर्मृदुवागनहंकृतः। ब्राह्मणाद्याश्रयो नित्यं उत्कृष्टां जातिं अश्नुते॥

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1 Bhashyas
Meaning
(शुचि:) शुद्ध पवित्र [ शरीर एवं मन से ], (उत्कृष्टशुश्रूषुः) अपने से उत्कृष्ट वर्ण वालों की सेवा करने वाला, (मृदुवाक्) मधुरभाषी, (अहंकृतः) अहंकार से रहित (नित्यं ब्राह्मण + आदि-आश्रयः) सदा ब्राह्मण आदि तीनों वर्गों की सेवा में संलग्न शुद्र भी (उत्कृष्टां जातिम् + अश्नुते) उत्तम वर्ण को प्राप्त कर लेता है ॥३३५॥