Adhyay 9

Manusmriti

Shloka 32 Chapter Nine

Adhyay 9
Shloka 32

Chapter Nine

Subject: राजधर्मान्तर्गत व्यवहार - निर्णय

336 Shloka
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Adhyay 9 Shloka 32
Shloka
भर्तरि पुत्रं विजानन्ति श्रुतिद्वैधं तु कर्तरि। आहुरुत्पादकं के चिदपरे क्षेत्रिणं विदुः॥

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1 Bhashyas
Meaning
(भर्तु: पुत्रम्' विजानन्ति) 'स्त्री के पति का ही पुत्र होता है। ऐसा माना जाता है (भर्तरि तु श्रुतिद्वधम्) किन्तु पति के विषय में दो विचार हैं(केचित् उत्पादकम् आहुः) कुछ लोग पुत्र उत्पन्न करने वाले को ही पुत्र का हकदार कहते हैं (अपरे क्षेत्रिणं विदुः) दूसरे कुछ लोग क्षेत्र अर्थात् स्त्रो के स्वामी को पुत्र का हकदार मानते हैं [चाहे उत्पादक कोई भी हो]॥३२॥