Adhyay 9

Manusmriti

Shloka 310 Chapter Nine

Adhyay 9
Shloka 310

Chapter Nine

Subject: राजधर्मान्तर्गत व्यवहार - निर्णय

336 Shloka
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Adhyay 9 Shloka 310
Shloka
प्रतापयुक्तस्तेजस्वी नित्यं स्यात्पापकर्मसु। दुष्टसामन्तहिंस्रश्च तदाग्नेयं व्रतं स्मृतम्॥

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1 Bhashyas
Meaning
राजा (पापकर्मसु) पापियों में पाप करने वालों को (नित्यम्) सदैव प्रतापयुक्तः तेजस्वी स्यात्) संतापित करने वाला और तेज से प्रभावित करने वाला होवे (च) और (दुष्टसामन्तहिंस्रः) दुष्ट मन्त्रो आदि का मारने वाला होवे (तत् आग्नेयं व्रतं स्मृतम्) यही राजा का 'आग्नेयव्रत' कहा है ॥३१०॥