Adhyay 9

Manusmriti

Shloka 302 Chapter Nine

Adhyay 9
Shloka 302

Chapter Nine

Subject: राजधर्मान्तर्गत व्यवहार - निर्णय

336 Shloka
9/302
Adhyay 9 Shloka 302
Shloka
कलिः प्रसुप्तो भवति स जाग्रद्द्वापरं युगम्। कर्मस्वभ्युद्यतस्त्रेता विचरंस्तु कृतं युगम्॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
(प्रसुप्तः कलिः भवति) जब राजा सोता है अर्थात् राज्यकार्यं में उपेक्षा परतता है तो वह 'कलियुग' होता है, (स: जाग्रत् द्वापरं युगम्) जब वह जागता है अर्थात् राज्यकार्य को साधारणतः करता रहता है तो वह 'द्वापरयुग' है, और (कर्मसु + अभ्युद्यतः त्रेता) राज्य और प्रजा हितकारी कार्यों में जब राजा सदा उद्यत रहता है वह 'त्रेतायुग' है, (विचरन् तु कृतं युगम्) जब राजा सभी कार्यो को तत्परतापूर्वक करते हुए अपनी प्रजा के दुःखों को जानने के लिए राज्य में विचरण करता है वह 'सतयुग' है ॥३०२॥