Adhyay 9

Manusmriti

Shloka 301 Chapter Nine

Adhyay 9
Shloka 301

Chapter Nine

Subject: राजधर्मान्तर्गत व्यवहार - निर्णय

336 Shloka
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Adhyay 9 Shloka 301
Shloka
कृतं त्रेतायुगं चैव द्वापरं कलिरेव च। राज्ञो वृत्तानि सर्वाणि राजा हि युगं उच्यते॥

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Subject
प्रजा के शासन में ही चार युग
Meaning
(कृतं त्रेतायुगं द्वापरं च कलिः) सतयुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग और कलियुग (सर्वारिण राज्ञः वृत्तानि) ये सब राजा के ही आचार-व्यवहार विशेष हैं अर्थात् राजा जैसा राज्य को बनाता है उस राज्य में वैसा ही युग बन जाता है (राजा हि युगम् + उच्यते) वस्तुतः राजा ही 'युग' कहलाता है अर्थात् राजा ही युग निर्माता है ॥३०१॥