Adhyay 9

Manusmriti

Shloka 300 Chapter Nine

Adhyay 9
Shloka 300

Chapter Nine

Subject: राजधर्मान्तर्गत व्यवहार - निर्णय

336 Shloka
9/300
Adhyay 9 Shloka 300
Shloka
आरभेतैव कर्माणि श्रान्तः श्रान्तः पुनः पुनः। कर्माण्यारभमाणं हि पुरुषं श्रीर्निषेवते॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
(श्रान्तः श्रान्तः) बार-बार हारा-थका हुआ भी राजा (कर्माणि पुन: पुन: एव) कार्यों को फिर-फिर अवश्य आरम्भ करे (हि) क्योंकि (कर्मारिण+ रमाणं हि पुरुषम्) कर्मों को प्रारम्भ करने वाले पुरुष को ही (श्री: निपेवते) विजयलक्ष्मी प्राप्त होती है ॥३००॥