Adhyay 9

Manusmriti

Shloka 297 Chapter Nine

Adhyay 9
Shloka 297

Chapter Nine

Subject: राजधर्मान्तर्गत व्यवहार - निर्णय

336 Shloka
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Adhyay 9 Shloka 297
Shloka
तेषु तेषु तु कृत्येषु तत्तदङ्गं विशिष्यते। येन यत्साध्यते कार्यं तत्तस्मिञ् श्रेष्ठं उच्यते॥

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1 Bhashyas
Meaning
(तेषु तेषु तु कृत्येषु) उन प्रकृतियों के अपने-अपने कार्यों में (तत् तत् अङ्ग विशिष्यते) वह-वह प्रकृति-अंग विशेष है (यत् कार्यं येन साध्यते) जो कार्य जिस प्रकृति से सिद्ध होता है (तस्मिन् तत् श्रेष्ठम + उच्यते) उसमें वही प्रकृति श्रेष्ठ मानी गई है। अर्थात् समयानुसार सभी प्रकृतियों की श्रेष्ठता है अतः किसी को कम महत्त्वपूर्ण समझकर त्याज्य न समझें॥२९७॥