Adhyay 9

Manusmriti

Shloka 296 Chapter Nine

Adhyay 9
Shloka 296

Chapter Nine

Subject: राजधर्मान्तर्गत व्यवहार - निर्णय

336 Shloka
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Adhyay 9 Shloka 296
Shloka
सप्ताङ्गस्येह राज्यस्य विष्टब्धस्य त्रिदण्डवत्। अन्योन्यगुणवैशेष्यान्न किं चिदतिरिच्यते॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
(इह) इसमें (त्रिदण्डवत्) तीन पायों पर स्थित तिपाई के समान (सप्ताङ्गस्य विष्टब्धस्य राज्यस्य) सात प्रकृतिरूपी अंगों पर स्थित इस राज्य में (अन्योन्यगुणवैशेष्यात्) सभी अंगों के अपनी-अपनो विशेषताओं से युक्त और परस्पर आश्रित होने के कारण (किंचित् न अतिरिच्यते) कोई अंग फालतू अर्थात् छोड़ने योग्य नहीं है ॥२९६॥