Adhyay 9

Manusmriti

Shloka 287 Chapter Nine

Adhyay 9
Shloka 287

Chapter Nine

Subject: राजधर्मान्तर्गत व्यवहार - निर्णय

336 Shloka
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Adhyay 9 Shloka 287
Shloka
समैर्हि विषमं यस्तु चरेद्वै मूल्यतोऽपि वा। समाप्नुयाद्दमं पूर्वं नरो मध्यमं एव वा॥

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1 Bhashyas
Meaning
(यः तु) जो (नरः) मनुष्य (समैः) समानमूल्य वाली वस्तुओं के बदले (अपि वा मूल्यतः) अथवा सही मूल्य से (विषमं चरेत्) कम वस्तु देने का व्यवहार करे, वह (पूर्व वा मध्यमम् + एव दमं समाप्नुयात्) 'पूर्वसाहस' या 'मध्यम-साहस' [८|१३८] दण्ड का भागी होता है॥२८७॥