Adhyay 9

Manusmriti

Shloka 285 Chapter Nine

Adhyay 9
Shloka 285

Chapter Nine

Subject: राजधर्मान्तर्गत व्यवहार - निर्णय

336 Shloka
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Adhyay 9 Shloka 285
Shloka
संक्रमध्वजयष्टीनां प्रतिमानां च भेदकः। प्रतिकुर्याच्च तत्सर्वं पञ्च दद्याच्छतानि च॥

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1 Bhashyas
Meaning
(संक्रम-ध्वज-यष्टीनाम्) संक्रम अर्थात् रथ, उस रथ के ध्वजा की यष्टि जिसके ऊपर ध्वजा बांधी जाती है (च) प्रौर (प्रतिमानां भेदक:) प्रतिमा छटांक आदिक बटखरे, जो इन तीनों को तोड़ डाले वा अधिक न्यून कर देवे (तत् सर्वं प्रतिकुर्यात्) उनको उससे राजा बनवा लेवे (च) और (पञ्चशतानि दद्यात्) जिसका जैसा ऐश्वर्य, उसके योग्य दण्ड करे - जो दरिद्र होवे तो उससे पांच सौ पैसा राजा दण्ड लेवे; और जो कुछ धनाढ्य होवे तो पांच सौ रुपया उससे दण्ड लेवे; और जो बहुत धनाढ्य होवे उससे पांच सौ अशर्फी दण्ड लेवे। रथादिकों को उसी के हाथ से बनवा लेवे ॥२८५॥