Adhyay 9

Manusmriti

Shloka 282 Chapter Nine

Adhyay 9
Shloka 282

Chapter Nine

Subject: राजधर्मान्तर्गत व्यवहार - निर्णय

336 Shloka
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Adhyay 9 Shloka 282
Shloka
समुत्सृजेद्राजमार्गे यस्त्वमेध्यं अनापदि। स द्वौ कार्षापणौ दद्यादमेध्यं चाशु शोधयेत्॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
(य: तु) जो व्यक्ति (अनापदि) स्वस्थ अवस्था में (राजमार्गे) सड़क पर मुख्य रास्ते या गली पर (अमेध्यं समुत्सृजेत्) मल, मूत्र आदि डाले तो (सः द्वौ कार्षापणौ दद्यात्) उस पर दो 'कार्षापण' [८ | १३६] दण्ड करे (च) और (आशु अमेध्यं शोधयेत्) तुरन्त उस गन्दगी को साफ करवाये॥२८२॥