Adhyay 9

Manusmriti

Shloka 28 Chapter Nine

Adhyay 9
Shloka 28

Chapter Nine

Subject: राजधर्मान्तर्गत व्यवहार - निर्णय

336 Shloka
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Adhyay 9 Shloka 28
Shloka
अपत्यं धर्मकार्याणि शुश्रूषा रतिरुत्तमा। दाराधीनस्तथा स्वर्गः पितॄणां आत्मनश्च ह॥

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Meaning
(अपत्यम्) सन्तानोत्पत्ति (धर्मकार्याणि) धर्म-कार्य (उत्तमा शुश्रूषा रतिः) उत्तम सेवा और रति (तथा आत्मनः च पितॄणां ह स्वर्गः) तथा अपना और पितरों का जितना सुख है वह सब (दाराधीनः) स्त्री ही के प्राधीन होता है॥२८॥(सं० वि० गृहाश्रम प्रकरण)