Adhyay 9

Manusmriti

Shloka 269 Chapter Nine

Adhyay 9
Shloka 269

Chapter Nine

Subject: राजधर्मान्तर्गत व्यवहार - निर्णय

336 Shloka
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Adhyay 9 Shloka 269
Shloka
ये तत्र नोपसर्पेयुर्मूलप्रणिहिताश्च ये। तान्प्रसह्य नृपो हन्यात्समित्रज्ञातिबान्धवान्॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
(ये) जो चोरों के सहयोगी और चोर (मूलप्रणिहिताः) पकड़े जाने की शंका से (तत्र न + उपसर्पेयुः) वहां [ सिपाहियों के पास या गुप्तचरों द्वारा निश्चित स्थान पर] न आवें तो (नृपः) राजा (समित्र-ज्ञाति-बान्धवान् तान्) मित्र, रिश्तेदार और बान्धवों सहित उन चोरों को (प्रसह्य) बलपूर्वक पकड़कर (हन्यात्) दण्डित करे ॥२६९॥