Adhyay 9

Manusmriti

Shloka 266 Chapter Nine

Adhyay 9
Shloka 266

Chapter Nine

Subject: राजधर्मान्तर्गत व्यवहार - निर्णय

336 Shloka
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Adhyay 9 Shloka 266
Shloka
एवंविधान्नृपो देशान्गुल्मैः स्थावरजङ्गमैः। तस्करप्रतिषेधार्थं चारैश्चाप्यनुचारयेत्॥

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1 Bhashyas
Meaning
(सभा-प्रपा + अपूपशाला) सभाओं के आयोजन स्थल, प्याऊ, मालपूत्रा आदि बेचने का स्थान [ भोजनालय, हलवाइयों की दुकान आदि ], (वेश-मद्यअन्नविक्रया:) वेश्याघर, मद्यस्थान, अनाज बेचने का स्थान [ मण्डी आदि], (चतुष्पथा:) चौराहे, (चैत्यवृक्षाः) प्रसिद्धवृक्ष जहां लोग इकठ्ठे होकर बैठते हैं, (समाजा:) सार्वजनिक स्थान, (प्रेक्षणानि) तमाशे के स्थान, (जीर्ण+उद्यान+ अरण्यानि) पुराने बगीचे और जंगल, (कारुक + प्रवेशनानि) शिल्पियों के स्थान, (शून्यानि अगाराणि) सूने पड़े हुए घर, (वनानि च उपवनानि) वन और उपवन, (राजा) राजा (एवंविधान देशान्) ऐसे स्थानों में (तस्करप्रतिषेधार्थम्) चोरों को रोकने के लिए (स्थावर जङ्गमैः गुल्मैः) एक स्थान पर रहने वाले और गश्त लगाने वाले सिपाहियों को (च) और (चारैः) गुप्तचरों को (अनुचारयेत्) विचरण कराये या नियुक्त करे ।। २६४–२६६ ।।